
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर स्थित संजय पार्क में आवारा कुत्तों के हमले से हिरण प्रजाति के 15 वन्यजीवों की मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है। घटना को गंभीरता से लेते हुए पार्क को तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया है।
वहीं लापरवाही के आरोप में सीसीएफ दिलराज प्रभाकर ने डिप्टी रेंजर सहित चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वन्यजीवों के बाड़े को सैनिटाइज करवाया जा रहा है ताकि दूसरे वन्यजीवों को बचाया जा सके।
सरगुजा डीएफओ अभिषेक जोगावत ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शनिवार को 14 वन्यजीवों की मौत हो गई थी, जबकि एक घायल हिरण ने रविवार को दम तोड़ दिया। इस प्रकार कुल 15 वन्य जीवों की जान चली गई। इनमें छह कोटरा,सात चीतल तथा दो चौसिंघा शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार-शनिवार की रात संजय पार्क से लगे जंगल क्षेत्र से कुछ आवारा कुत्ते पार्क परिसर में घुस आए। ये कुत्ते सुरक्षा व्यवस्था में खामियों का फायदा उठाते हुए हिरणों के बाड़े तक पहुंच गए और वहां मौजूद हिरण, सांभर व कोटरी प्रजाति के वन्यजीवों पर हमला कर दिया।
हमले में कई हिरण गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से 14 की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

शनिवार सुबह जब पार्क के कर्मचारियों को घटना की जानकारी मिली तो विभाग में अफरा-तफरी मच गई। वन विभाग ने तत्काल पशु चिकित्सकों की टीम को बुलाकर मृत हिरणों का पोस्टमार्टम कराया और शवों का विधिवत अंतिम संस्कार किया गया।
एक घायल हिरण का पशु चिकित्सक उपचार कर रहे थे। रविवार को उसकी भी मौत हो गई। उसका भी पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया गया।

डीएफओ जोगावत ने बताया कि प्रथम दृष्टया हिरणों की मौत का कारण ‘कार्डियक अरेस्ट’ (हृदय गति रुकना) प्रतीत हो रहा है, जो हमले के दौरान अत्यधिक भय और चोट के कारण हुआ। घटना की जांच के लिए अंबिकापुर एसडीओ फॉरेस्ट के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई है, जिसे 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
घटना के समय पार्क में कोई भी सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था, जिसे गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। डीएफओ के प्रतिवेदन के आधार पर सीसीएफ दिलराज प्रभाकर ने संजय पार्क के प्रभारी डिप्टी रेंजर अशोक सिन्हा, वनपाल ममता परते,प्रतिमा लकड़ा ,बिंदु सिंह को निलंबित कर दिया है।
अंबिकापुर रेंजर अक्षपलक ऋषि को कारण बताओ नोटिस जारी कर जबाब मांगा गया है। संजय पार्क में वर्तमान में कुल 31 हिरण थे, जिनमें से 15 की मौत हो चुकी है। वर्तमान में पार्क में 16 हिरण शेष हैं। पूरे परिसर को सैनेटाइज किया जा रहा है तथा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

गौरतलब है कि संजय पार्क रेस्क्यू सेंटर के रूप में संचालित किया जाता है। यहां पूरे संभाग से घायल, बीमार अथवा असहाय वन्यजीवों को लाकर उनका उपचार एवं संरक्षण किया जाता है। पार्क में हिरणों के अलावा मोर सहित कई अन्य पक्षी और वन्यजीव भी संरक्षित हैं।
करीब पांच वर्ष पूर्व संजय पार्क में लगभग 100 से अधिक हिरण मौजूद थे, जिनमें से लगभग 60 से अधिक हिरणों को रमकोला स्थित राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में छोड़ दिया गया था। स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे संजय पार्क में लंबे समय से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लापरवाही बरती जा रही थी।

माना जा रहा है कि इसी लापरवाही के कारण इतनी बड़ी घटना घटित हुई है। अब वन विभाग द्वारा पार्क की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की बात कही जा रही है। पार्क के पीछे का हिस्सा पूरी तरह असुरक्षित है। यह डीएफओ और सीसीएफ कार्यालय के पीछे का क्षेत्र है।
जहां जंगल है। इसी के नजदीक अंबिकापुर का मटन,मुर्गा और मछली बाजार है। यहां के अवशेषों का सेवन करने वाले कुत्ते ज्यादा हिंसक और खूंखार है। इनका विचरण पार्क के पीछे जंगल क्षेत्र में भी होता है। ये झुंड में रहते है।