• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • अंबिकापुर

भूमिगत खदान के ऊपरी क्षेत्र में फिर फटी जमीन, खतरा बढ़ा: एसईसीएल की बैकुंठपुर क्षेत्र में लापरवाही उजागर

एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र के पांडवपारा और झिलमिली खदान के ऊपर स्थित जंगलों में एक बार फिर जमीन फटने से गहरी दरारें उभर आई हैं। मरम्मत पर लाखों खर्च हो...और पढ़ें

By Asim Sen GuptaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 11:00:42 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 11:00:42 AM (IST)
भूमिगत खदान के ऊपरी क्षेत्र में फिर फटी जमीन, खतरा बढ़ा: एसईसीएल की बैकुंठपुर क्षेत्र में लापरवाही उजागर
इसी क्षेत्र की जमीन फट रही

HighLights

  1. कोपरझरिया नाला के पास दरारों से आ रही खदान की हवा।
  2. मरम्मत के कुछ ही दिनों बाद दोबारा चौड़ी हुईं जमीन की दरारें।
  3. ग्रामीणों और मवेशियों की आवाजाही वाले इलाके में सुरक्षा प्रबंध नदारद।

नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र की पाण्डवपारा व झिलमिली भूमिगत खदान के ऊपर वाले जंगल की जमीन एक बार फिर जगह-जगह से फट रही है। करीब एक माह पहले जिन दरारों की भराई और ढलाई कराई गई थी, वे दोबारा उभर आई हैं।सबसे गंभीर स्थिति सूरजपुर जिले के धरसेड़ी, गोविंदगढ़, बड़सरा, आमाखोखा और खोड़ गांव से लगे जंगल में है।

जंगल में पहले दरारें पड़ने पर भराई कर ऊपर ढलाई की गई थी। इसमें लाखों रुपये खर्च होने की जानकारी है। मरम्मत के बाद उम्मीद थी कि जमीन स्थिर हो जाएगी। लेकिन अब कोपरझरिया नाला क्षेत्र में फिर से चौड़ी और गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं।इससे ग्रामीणों के साथ मवेशियों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है।


इन दरारों से खदान के भीतर की हवा ऊपर आ रही है। इससे स्पष्ट है कि दरारें भूमिगत खदान के ऊपरी सतह से आरंभ हो गई है, यह खदान के भीतर काम करने वाले कामगारों की सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरनाक है।ग्रामीण दावा कर रहे हैं कि नदी का पानी भी दरारों से खदान में रिस रहा है।यह ज्यादा खतरनाक स्थिति है।

यह भी पढ़ें- बस-इनोवा की आमने-सामने जबरदस्त टक्कर, महिला की मौत, सात घायल: अंबिकापुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसा

लोगों की आवाजाही वाला क्षेत्र

यह इलाका निर्जन नहीं है। आसपास के गांवों के लोग मवेशी चराने रोज इस जंगल में जाते हैं। जंगली जीव भी इसी क्षेत्र में रहते हैं। जमीन पर गहरी दरारें होने से हादसे का खतरा बना हुआ है। प्रभावित जगहों पर बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगे हैं।कुछ स्थानों पर दरारों को बंद करने के लिए बड़े पेड़ों के तने काटकर डाले जा रहे हैं,यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।यह लोगों को सतर्क जरूर कर सकता है।

प्रबंधन की भूमिका पर सवाल

भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील साहू ने कहा कि पिछले एक-दो साल से जंगल में जमीन फटने की घटनाएं हो रही हैं। इसमें कई जंगली जीव गिरकर मर गए हैं। पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। चरवाहों और मवेशियों की जान को खतरा है। साथ ही जलस्तर भी नीचे जा रहा है।

खोड़ के सरपंच मंगल सिंह ने कहा कि एसईसीएल पांच गांवों को गोद लेने का दावा करती है लेकिन गांव के विकास के लिए कोई काम नहीं हुआ। अब जंगल भी खत्म हो रहा है। ग्रामीण मवेशी चराने और जीवनयापन के लिए जंगल पर निर्भर हैं। प्रबंधक से कई बार बात की गई लेकिन सिर्फ टालमटोल हुआ।इस विषय पर एसईसीएल प्रबंधक जितेन्द्र कुमार ने कहा कि मैं इस पर मौके का जांच कराता हूं।

सुरक्षा के लिए यह उपाय जरूरी

  • प्रभावित क्षेत्र को चिन्हित कर बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाई जाए।
  • दरारों की गहराई और फैलाव की भू-तकनीकी जांच और विशेषज्ञों के सुझाव अनुरूप सुरक्षा उपाय।
  • खदान की भूमिगत गतिविधियों और सतह की दरारों के बीच संबंध की जांच। खान सुरक्षा निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन
  • पहले हुए मरम्मत कार्य के गुणवत्ता की जांच,नए सिरे से सुरक्षा उपाय।