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प्रेम विवाह की ऐसी सजा! 75 वर्षीय महिला की मौत के बाद भी कोई नहीं आया, अपनों ने ठुकराया

जानकारी के अनुसार सावित्री बाई के पहले पति की कई साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद उन्होंने अपनी मर्जी से दूसरे समाज के एक व्यक्ति से प्रेम विवाह कर लिय...और पढ़ें

By Vinod ShriwashEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Fri, 31 Jul 2026 07:33:04 PM (IST)Updated Date: Fri, 31 Jul 2026 08:54:41 PM (IST)
प्रेम विवाह की ऐसी सजा! 75 वर्षीय महिला की मौत के बाद भी कोई नहीं आया, अपनों ने ठुकराया
अंबिकापुर में बुजुर्ग महिला की मौत पर कोई नहीं आया। - एआई फोटो।

HighLights

  1. बहिष्कार के बाद मौत पर भी नहीं आया कोई।
  2. सावित्री बाई को अपनों ने ही ठुकरा दिया।
  3. महापौर मंजूषा भगत ने कराया अंतिम संस्कार।

नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर। प्रेम विवाह करना कई बार इतना बड़ा दोष बन जाता है कि इंसान जीते जी भी अकेला रह जाता है और मरने के बाद भी उसे कंधा देने वाला कोई नहीं मिलता। अंबिकापुर के शांतिनगर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है।

यहां वार्ड क्रमांक-चार की निवासी 75 वर्षीय सावित्री बाई का निधन हो गया। लेकिन प्रेम विवाह के कारण वर्षों पहले समाज और परिवार द्वारा किए गए बहिष्कार की वजह से उनके अंतिम संस्कार के लिए न स्वजन आए और न समाज के लोग। सूचना मिलने पर अंबिकापुर की महापौर मंजूषा भगत ने मौके पर पहुंचकर महिला का अंतिम संस्कार कराया।


जानकारी के अनुसार सावित्री बाई के पहले पति की कई साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद उन्होंने अपनी मर्जी से दूसरे समाज के एक व्यक्ति से प्रेम विवाह कर लिया। बस इसी बात को लेकर उनके अपने समाज ने उन्हें बहिष्कृत कर दिया। धीरे-धीरे मायके पक्ष ने भी उनसे नाता तोड़ लिया।

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महापौर मंजूषा भगत

सावित्री बाई की कोई संतान नहीं थी। प्रेम विवाह के बाद बना परिवार भी सामाजिक दबाव के कारण साथ नहीं दे पाया। पति अंतिम संस्कार करना चाहते थे, लेकिन उनके अपने समाज के विरोध के कारण वे भी बेबस हो गए।

मृत्यु की जानकारी मिलने पर महापौर मंजूषा भगत तत्काल पहुंचीं। उन्होंने नगर निगम के एक्सीवेटर से गड्ढा खोदवाया और सामाजिक परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक महिला का अंतिम संस्कार कराया।

इस दौरान महापौर भावुक हो गईं। उन्होंने कहा -मौत के बाद भी अगर कोई समाज अपने ही व्यक्ति के साथ खड़ा न हो सके, तो ऐसे समाज का होना या न होना बराबर है। सावित्री देवी का कोई सहारा नहीं था। ऐसे समय में आगे आकर मानवता का धर्म निभाना ही चाहिए।