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कांकेर में जवानों को मिली बड़ी सफलता, 3 माओवादियों ने किया सरेंडर, अब 14 की तलाश जारी

शनिवार को पखांजूर क्षेत्र के परतापुर थाने में एरिया कमेटी सदस्य राधिका कुंजाम, संदीप कड़ियाम और रैनू पद्दा ने समर्पण कर दिया है।

By Ramkrishna DongreEdited By: Himadri Singh Hada
Publish Date: Sat, 28 Mar 2026 08:11:02 PM (IST)Updated Date: Sat, 28 Mar 2026 08:11:02 PM (IST)
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कांकेर में जवानों को मिली बड़ी सफलता, 3 माओवादियों ने किया सरेंडर, अब 14 की तलाश जारी
3 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण।

HighLights

  1. कांकेर में जवानों को मिली बड़ी सफलता
  2. 3 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
  3. शेष 14 माओवादियों का समर्पण चुनौती

नईदुनिया प्रतिनिधि, बड़गांव। कांकेर जिले में माओवादियों के लगातार आत्मसमर्पण से संगठन को बड़ा झटका लगा है। शनिवार को पखांजूर क्षेत्र के परतापुर थाने में एरिया कमेटी सदस्य राधिका कुंजाम, संदीप कड़ियाम और रैनू पद्दा ने समर्पण कर दिया है।

इनके पास से दो एसएलआर और एक 303 राइफल मिली है। बीते चार दिनों में नौ माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। पुलिस के सामने शेष बचे 14 माओवादियों का समर्पण करवाना सबसे बड़ी चुनौती है।

बड़े चेहरों का समर्पण पुलिस के लिए बड़ी चुनौती

सूत्रों के अनुसार मिलिट्री कंपनी की सदस्य व आठ लाख की इनामी स्वरूपा व अन्य समर्पण ने संगठन को अंदर तक प्रभावित किया है। हालांकि स्टेट कमेटी सदस्य रूपी और डिविजनल कमेटी सदस्य चंदर के आत्मसमर्पण की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन अब तक दोनों ने हथियार नहीं डाले हैं।


जानकारी के मुताबिक रूपी राजनांदगांव-कांकेर-बैलाडीला डिवीजन के माओवादी विजय रेड्डी की पत्नी है और वह अब भी जंगलों में सक्रिय रहकर संगठन को संभाल रही है।

प्रशासन की अपील और आत्मसमर्पण नीति का असर

पखांजूर एडिशनल एसपी राकेश कुर्रे का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली जानकारियों के आधार पर शेष माओवादियों से संपर्क साधने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही शेष बचे माओवादी भी समर्पण कर देंगे।

बस्तर रेंज के आइजी सुंदरराज पी. ने शेष माओवादियों से भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है। पूर्व माओवादी स्वरूपा के आत्मसमर्पण के बाद अब उनके हाथ से लिखा हुआ मार्मिक पत्र इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। यह पत्र गोंडी भाषा में लिखा गया है, जिसमें स्वरूपा ने अपने पूर्व साथियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।

आंकड़ों में आत्मसमर्पण और माओवाद का इतिहास

सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में सुरक्षा बल के लगातार अभियान और सरकार की आत्मसमर्पण नीति के दबाव के चलते माओवादी संगठन के सदस्य मुख्यधारा में लौट रहे हैं। कांकेर सहित बस्तर के सात जिलों में जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक कुल 2,756 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।

कांकेर जिले में माओवाद का प्रभाव 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में पड़ोस के आंध्र प्रदेश और गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) से आए माओवादियों के माध्यम से शुरू हुआ। जिले की पहाड़ियां और घने जंगल माओवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह और प्रशिक्षण शिविर के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं।

जिले में अब तक की प्रमुख मुठभेड़ें

मार्च 2025 - बीजापुर-कांकेर सीमा पर हुई मुठभेड़ में 30 माओवादी ढेर।

अप्रैल 2025 - कांकेर के छोटे बेठिया थाना क्षेत्र में 29 माओवादी मारे गए।

अगस्त 2025 - कांकेर-बस्तर सीमा पर मंडा पहाड़ के पास मुठभेड़ में तीन माओवादी ढेर।

सितंबर 2024 - कांकेर के छिंदखड़क जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में तीन माओवादी मारे गए।

फरवरी 2026 - कांकेर के जंगलों में हुई मुठभेड़ में दो सक्रिय माओवादी मारे गए।