
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय ने नकल के खिलाफ इस वर्ष की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य परीक्षा 2025-26 के 74 परीक्षार्थियों के प्रश्नपत्र निरस्त कर दिए हैं। कुल 80 नकल प्रकरणों की जांच के बाद गठित समिति ने छह विद्यार्थियों को दोषमुक्त पाया, जबकि 74 मामलों में कार्रवाई की अनुशंसा की। जिसके बाद उनका पेपर निरस्त कर दिया गया। विश्वविद्यालय का मानना है कि नकल के प्रति सख्ती के साथ जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।
मार्च-अप्रैल में आयोजित शिक्षण सत्र 2025-26 की मुख्य परीक्षा में दर्ज 80 नकल प्रकरणों पर कई चरणों में हुई सुनवाई के बाद विश्वविद्यालय की नकल प्रकरण समिति ने अंतिम निर्णय लिया। चार अगस्त को आयोजित अंतिम बैठक में छह परीक्षार्थियों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर नकल प्रकरण से मुक्त कर दिया गया, जबकि 74 परीक्षार्थियों के संबंधित प्रश्नपत्र निरस्त कर दिए गए। इनमें कुछ विद्यार्थियों को पूरक परीक्षा देनी होगी, जबकि कुछ को संबंधित विषय में अनुत्तीर्ण घोषित किया गया है।
हालांकि समिति ने किसी भी छात्र पर एक या दो वर्ष का परीक्षा प्रतिबंध नहीं लगाया। कुलपति प्रो. ललित प्रकाश पटेरिया ने कहा कि विश्वविद्यालय नकल के मामलों में जीरो टालरेंस नीति पर काम कर रहा है। विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर मिलें, लेकिन उनमें ईमानदारी, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नकल से सफलता नहीं, चरित्र कमजोर होता है। इसलिए युवाओं में स्वयं नकल नहीं करने की आदत विकसित होनी चाहिए, ताकि वे नए भारत की परिकल्पना को साकार करने में सार्थक भूमिका निभा सकें। विश्वविद्यालय ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि परीक्षा की शुचिता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
45 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने दी थी मुख्य परीक्षा
विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में इस वर्ष 45,529 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इनमें 22,473 नियमित, 22,319 निजी, 253 भूतपूर्व तथा 484 पूरक परीक्षार्थी शामिल थे। पूरे परीक्षा सत्र में 58 विषय कोड की परीक्षाएं आयोजित की गईं। इतने बड़े परीक्षा आयोजन के बीच नकल प्रकरणों की संख्या सीमित रहना परीक्षा व्यवस्था की सख्ती को भी दर्शाता है।
चार जिलों के 68 केंद्रों पर हुई थी परीक्षा
मुख्य परीक्षा के संचालन के लिए विश्वविद्यालय ने बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा और पेंड्रारोड के 68 महाविद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया था। सभी केंद्रों पर प्रश्नपत्र वितरण, गोपनीयता और निगरानी की विशेष व्यवस्था की गई थी। यह कार्रवाई केवल वार्षिक पद्धति की परीक्षाओं से संबंधित है। एनईपी, यूटीडी और विधि संकाय की परीक्षाओं के नकल प्रकरणों का परीक्षण अभी शेष है।
समिति ने दंड नहीं, सुधार के संदेश को दी प्राथमिकता
नकल प्रकरण समिति ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि नकल सामाजिक बुराई है, जिसे केवल कठोर दंड से नहीं बल्कि जागरूकता और नैतिक शिक्षा से समाप्त किया जा सकता है। इसी सोच के तहत विद्यार्थियों के प्रश्नपत्र निरस्त किए गए, लेकिन किसी पर एक या दो वर्ष का
वर्जन
निष्पक्ष ढंग से हुई सुनवाईनकल प्रकरण समिति की अनुशंसा के आधार पर कार्रवाई की गई है। सभी मामलों की सुनवाई निष्पक्ष ढंग से की गई। जिन विद्यार्थियों के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण मिले, उनके संबंधित प्रश्नपत्र निरस्त किए गए हैं। विश्वविद्यालय परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आगे भी सख्ती से कार्य करता रहेगा।
-रामेश्वर राठौर,परीक्षा नियंत्रक,अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय