• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से दैनिक वेतनभोगियों को बड़ी राहत: समान कर्मचारियों से सेवा अभिलेखों का मिलान करने के निर्देश

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 16 साल से कार्यरत दैनिक वेतनभोगियों के पक्ष में अहम फैसला देते हुए 90 दिन के भीतर उनके अभिलेखों का मिलान 2022-24 में नियमित हुए...और पढ़ें

By Mohammad Safraj MemonEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 09:29:32 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 09:29:32 AM (IST)
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से दैनिक वेतनभोगियों को बड़ी राहत: समान कर्मचारियों से सेवा अभिलेखों का मिलान करने के निर्देश
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

HighLights

  1. गरियाबंद जिले के आदिवासी बालक आश्रमों और छात्रावासों का मामला।
  2. समानता के अधिकार के तहत मिलेगा नियमितीकरण का लाभ।
  3. न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ का ऐतिहासिक फैसला।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: गरियाबंद जिले के आदिवासी बालक आश्रमों और छात्रावासों में 16 वर्षों से अधिक समय से दैनिक वेतनभोगी के रूप में काम कर रहे कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से राहत मिली है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि वर्ष 2022 और 2024 में नियमित किए गए समान स्थिति वाले कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों से याचिकाकर्ताओं के रिकार्ड का मिलान किया जाए।

यदि दोनों की स्थिति समान पाई जाती है तो याचिकाकर्ताओं को भी संबंधित कर्मचारियों के समान तिथि से नियमितीकरण का लाभ दिया जाए। न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने लोचन प्रसाद पांडेय सहित अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से 90 दिनों के भीतर पूरी करने को कहा है।


याचिकाकर्ताओं के अनुसार वे गरियाबंद जिले के विभिन्न आदिवासी बालक आश्रमों और छात्रावासों में लंबे समय से दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत हैं। उनका कहना था कि विभाग में उनके समान पद और योग्यता वाले कई कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है, जबकि उन्हें नियमितीकरण के लाभ से वंचित रखा गया।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि शासन के पांच मार्च 2008 के परिपत्र के आधार पर विभाग ने 28 फरवरी 2022 और 18 अक्टूबर 2024 को समान स्थिति वाले कई दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित किया था। इसके बावजूद लंबे समय से सेवा दे रहे याचिकाकर्ताओं के मामले पर समान आधार पर विचार नहीं किया गया।

यह भी पढ़ें- PSC अफसरों की पदोन्नति पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का आदेश, 3 माह में फैसला ले सरकार

समान कर्मचारियों से रिकार्ड मिलाने का आदेश

याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि जब समान योग्यता, पद और सेवा अवधि वाले कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ दिया गया है तो उन्हें इससे वंचित करना समानता के अधिकार के विपरीत है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के नरेंद्र कुमार तिवारी बनाम झारखंड राज्य मामले में दिए गए विधिक सिद्धांतों का भी हवाला दिया गया। हाई कोर्ट ने मामले में विभाग को यह जांचने का निर्देश दिया कि वर्ष 2022 और 2024 में नियमित किए गए कर्मचारियों तथा याचिकाकर्ताओं की सेवा संबंधी परिस्थितियां समान हैं या नहीं।

समान पाए जाने पर पिछली तिथि से लाभ

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अभिलेखों की जांच में याचिकाकर्ताओं की स्थिति नियमित किए गए कर्मचारियों के समान पाई जाती है, तो उन्हें भी उन्हीं कर्मचारियों के समान तिथि से नियमितीकरण का लाभ दिया जाए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को यह पूरी प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इस तरह हाई कोर्ट के आदेश से लंबे समय से नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के मामले में विभागीय स्तर पर नए सिरे से विचार का रास्ता खुल गया है।