पुलिस अफसरों की ट्रांसफर लिस्ट पर हाई कोर्ट की रोक, जूनियर्स को SP बनाने पर राज्य सरकार को नोटिस
वरिष्ठता में ऊपर होने के बावजूद जूनियरों को एसपी- कमांडेंट का प्रभार हाई कोर्ट ने पदस्थापना आदेश पर लगाई रोक, एडिशनल एसपी रिचा मिश्रा की याचिका पर राज...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 07:57:24 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 07:57:24 AM (IST)
HighLights
- सीनियर को छोड़ जूनियर को एसपी-कमांडेंट प्रभार देने पर हाई कोर्ट का स्टे।
- एएसपी रिचा मिश्रा की याचिका पर राज्य सरकार व 8 अफसरों को नोटिस।
- 2014 के शासन परिपत्र का उल्लंघन मानकर कोर्ट ने माना केस।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस में वरिष्ठता को दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारियों को पुलिस अधीक्षक और कमांडेंट जैसे उच्च पदों का प्रभार दिए जाने के मामले में हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया गंभीरता दिखाई है। न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने एडिशनल एसपी रिचा मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए 20 जुलाई 2026 को जारी विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर याचिकाकर्ता की सीमा तक अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है।
कोर्ट ने राज्य सरकार के साथ ही प्रभार पाने वाले आठ कनिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। राज्य सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार किया। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी।
याचिकाकर्ता रिचा मिश्रा वर्तमान में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। याचिका में बताया गया कि संबंधित वरिष्ठता-प्रावीण्य सूची में उनका नाम 35वें क्रम पर है। इसके बावजूद शासन ने 20 जुलाई 2026 को जारी आदेश में उनसे कनिष्ठ अधिकारियों को पुलिस अधीक्षक और कमांडेंट के पदों का प्रभार सौंप दिया। वहीं, याचिकाकर्ता को उप-कमांडेंट के पद पर पदस्थ किया गया। इसे चुनौती देते हुए उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
2014 के शासन परिपत्र का दिया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि शासन के 14 जुलाई 2014 के परिपत्र में स्पष्ट व्यवस्था है कि वरिष्ठ अधिकारी को दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारी को उच्च पद का प्रभार नहीं सौंपा जा सकता। इसके बावजूद 20 जुलाई के आदेश में वरिष्ठता के क्रम की अनदेखी की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि वरिष्ठता में ऊपर होने के बावजूद उन्हें अपेक्षाकृत कनिष्ठ पद पर भेजना मनमाना और शासन की अपनी नीति के विपरीत है।
हाई कोर्ट ने माना प्रथम दृष्टया मामला बनता है
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने 14 जुलाई 2014 के शासन परिपत्र का अवलोकन किया। कोर्ट के समक्ष रखी गई सामग्री के आधार पर याचिकाकर्ता के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला बनता पाया गया। इसके बाद एकलपीठ ने 20 जुलाई 2026 के विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर याचिकाकर्ता के संबंध में अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही राज्य सरकार और संबंधित कनिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
23 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
राज्य सरकार की ओर से मामले में जवाब प्रस्तुत करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा गया है। अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 23 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया है। फिलहाल हाई कोर्ट की अंतरिम रोक याचिकाकर्ता रिचा मिश्रा से संबंधित विवादित पदस्थापना/प्रभार व्यवस्था तक सीमित है।