
बिलासपुर। उम्र 65 साल... जिंदगी की वह पारी, जब ज्यादातर लोग आराम को अपना साथी बना लेते हैं। लेकिन मेडिकल कालेज सिम्स रोड निवासी जोगेश कुमार डाह ने इस उम्र में किताबों को अपना साथी चुना। एसईसीएल में पोस्ट मास्टर के पद से सेवानिवृत्त जोगेश ने बचपन में कानून पढ़ने का सपना देखा था, मगर नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच वह सपना दब गया।
अपने सपनों को सकार करने की कहानी
बचपन का सपना हुआ सच: जोगेश कुमार बचपन से ही कानून (विधि) की पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उस वक्त अवसर नहीं मिल सका।
रिटायरमेंट के बाद फिर बने स्टूडेंट: एसईसीएल से पोस्ट मास्टर पद से रिटायर होने और जिम्मेदारियाँ कम होने के बाद उन्होंने अपने दब चुके सपने को फिर से जगाया और लॉ कॉलेज में एडमिशन लिया।
समय के सदुपयोग का दिया संदेश: फीस जमा करने के बाद जोगेश ने कहा, "घर में खाली बैठने से अच्छा है कि समय का सदुपयोग पढ़ाई में किया जाए। ज़िंदगी ने दोबारा मौका दिया है तो सपना पूरा करना चाहिए।"
समाज के लिए प्रेरणा: जोगेश की यह कहानी उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है जो बढ़ती उम्र या परिस्थितियों को सीखने की राह में रुकावट मान लेते हैं।