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बिलासपुर में रिटायरमेंट के बाद थामी किताबों की डोर; सपनों को उड़ान देने 65 का जज्बा चला, कानून की पढ़ाई की ओर

बिलासपुर के सिम्स रोड निवासी एवं एसईसीएल के सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर 65 वर्षीय जोगेश कुमार डाह ने उम्र को दरकिनार कर अपने बचपन के कानून पढ़ने के सपने ...और पढ़ें

By Dhirendra Kumar SinhaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 11:51:14 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 11:51:14 AM (IST)
बिलासपुर में रिटायरमेंट के बाद थामी किताबों की डोर;  सपनों को उड़ान  देने 65  का जज्बा चला, कानून की पढ़ाई की ओर
जोगेश कुमार डाह

HighLights

  1. 65 वर्ष की उम्र में रिटायर्ड पोस्ट मास्टर बने विधि छात्र।
  2. कौशलेंद्र राव लॉ कॉलेज बिलासपुर में एलएलबी में लिया प्रवेश।
  3. बचपन का कानून पढ़ने का सपना रिटायरमेंट के बाद किया पूरा।

बिलासपुर। उम्र 65 साल... जिंदगी की वह पारी, जब ज्यादातर लोग आराम को अपना साथी बना लेते हैं। लेकिन मेडिकल कालेज सिम्स रोड निवासी जोगेश कुमार डाह ने इस उम्र में किताबों को अपना साथी चुना। एसईसीएल में पोस्ट मास्टर के पद से सेवानिवृत्त जोगेश ने बचपन में कानून पढ़ने का सपना देखा था, मगर नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच वह सपना दब गया।

अब जिम्मेदारियां कुछ कम हुईं तो उन्होंने अधूरे सपने को फिर से जगा दिया। इस साल उन्होंने लिंक रोड स्थित कौशलेंद्र राव विधि महाविद्यालय में प्रवेश लिया है। फीस जमा करने के बाद बोले “पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। घर में खाली बैठने से अच्छा है कि समय का सदुपयोग पढ़ाई में किया जाए।”


उनका कहना है कि बचपन से विधि पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन तब अवसर नहीं मिला। अब लगता है कि जिंदगी ने दोबारा मौका दिया है तो सपना पूरा कर लेना चाहिए। जोगेश कुमार की कहानी सिर्फ एक प्रवेश की कहानी नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए संदेश है जो उम्र या परिस्थितियों को सीखने की राह में दीवार मान लेते हैं। सपना अगर जिंदा हो तो 65 की उम्र में भी जिंदगी नई कक्षा से शुरू की जा सकती है

अपने सपनों को सकार करने की कहानी

बचपन का सपना हुआ सच: जोगेश कुमार बचपन से ही कानून (विधि) की पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उस वक्त अवसर नहीं मिल सका।

रिटायरमेंट के बाद फिर बने स्टूडेंट: एसईसीएल से पोस्ट मास्टर पद से रिटायर होने और जिम्मेदारियाँ कम होने के बाद उन्होंने अपने दब चुके सपने को फिर से जगाया और लॉ कॉलेज में एडमिशन लिया।

समय के सदुपयोग का दिया संदेश: फीस जमा करने के बाद जोगेश ने कहा, "घर में खाली बैठने से अच्छा है कि समय का सदुपयोग पढ़ाई में किया जाए। ज़िंदगी ने दोबारा मौका दिया है तो सपना पूरा करना चाहिए।"

समाज के लिए प्रेरणा: जोगेश की यह कहानी उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है जो बढ़ती उम्र या परिस्थितियों को सीखने की राह में रुकावट मान लेते हैं।

न ढली है उमंग, न थमी है रवानगी,

65 की उम्र में भी जागी है वही सादगी।

रिटायरमेंट की शाम को जिन्होंने सुबह बना दिया,

ढलती उम्र के साए को जिन्होंने नया मोड़ दे दिया॥

नौकरी-फर्ज की राहों में जो दबा रह गया था सपना,

आज किताबों की दुनिया में बना लिया उसे अपना।

न कोई संकोच मन में, न झिझक का कोई नाम,

'छात्र' बनकर जोगेश ने पाया नया मुकाम॥

कानून की इस राह पर फिर कदम बढ़ाए हैं,

हौसले के दीये जलाकर अंधेरे मिटाए हैं।

सीख यही देती है यह बिलासपुर की कहानी,

इरादे पक्के हों तो हर उम्र होती है मस्तानी॥