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छग का पहला रामसर साइट कौन सा है? रामटेकरी मंदिर किसने बनवाया? व्यापमं परीक्षा में पूछे गए ऐसे सवाल, गणित रहा कठिन

रविवार 26 जुलाई 2026 को बिलासपुर के 81 केंद्रों पर व्यापमं की 'प्रयोगशाला परिचालक' और सीजीपीएससी की 'सहायक ग्रंथपाल' परीक्षा कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजि...और पढ़ें

By Dhirendra Kumar SinhaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Mon, 27 Jul 2026 09:17:24 AM (IST)Updated Date: Mon, 27 Jul 2026 09:17:24 AM (IST)
छग का पहला रामसर साइट कौन सा है? रामटेकरी मंदिर किसने बनवाया? व्यापमं परीक्षा में पूछे गए ऐसे सवाल, गणित रहा कठिन
परीक्षा केंद्रों में दिनभर पहुंचते रहे उड़नदस्ता

HighLights

  1. नीट के बाद बदला सुरक्षा मॉडल: बायोमीट्रिक व हैंड स्कैनर से हुई जांच
  2. छत्तीसगढ़ ज्ञान ने दी राहत, समय प्रबंधन बना सफलता की कुंजी
  3. नीट का असर: कड़े पहरे में हुई व्यापमं और PSC की परीक्षाएं; छत्तीसगढ़ GS के आसान सवालों से खिले चेहरे

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: रविवार को बिलासपुर सरकारी भर्ती परीक्षाओं का बड़ा केंद्र बना रहा। छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की प्रयोगशाला परिचालक भर्ती परीक्षा और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की सहायक ग्रंथपाल प्रारंभिक परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई। देशभर में नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद बनी संवेदनशील परिस्थितियों का असर यहां भी साफ दिखाई दिया। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को बहुस्तरीय जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया, जबकि प्रश्नपत्र ने भी अधिकांश परीक्षार्थियों की अच्छी-खासी परीक्षा ले ली। छग का पहला रामसर साइट कौन सा है, रामटेकरी मंदिर किसने बनवाया जैसे सवाल पूछे गए।

बिलासपुर में प्रयोगशाला परिचालक भर्ती परीक्षा के लिए 76 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। कुल 23,906 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें 14,007 ने परीक्षा दी, जबकि 9,897 अनुपस्थित रहे। उपस्थिति 58.60 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की सहायक ग्रंथपाल प्रारंभिक परीक्षा सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक आयोजित हुई। इसमें पांच केंद्र बनाए गए थे। 1,703 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें 1,188 शामिल हुए, जबकि 515 अनुपस्थित रहे। नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली पर बढ़ी निगरानी का असर बिलासपुर के सभी केंद्रों पर स्पष्ट दिखा। प्रवेश द्वार पर एडमिट कार्ड और फोटो पहचान पत्र का मिलान किया गया।


अभ्यर्थियों की मेटल डिटेक्टर-हैंड स्कैनर से जांच हुई। जेब, घड़ी, मोबाइल, ब्लूटूथ डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा संदिग्ध सामग्री की सघन जांच के बाद ही परीक्षा कक्ष में प्रवेश मिला। केंद्राध्यक्ष से लेकर वीक्षक, उड़नदस्ता और सुरक्षा कर्मी लगातार निगरानी करते रहे। सीएमडी पीजी कालेज, बिलासा कन्या पीजी कालेज, कौशलेंद्र राव विधि महाविद्यालय, शासकीय जेपी वर्मा कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय समेत शहर के लगभग सभी स्कूल व कालेजों को केंद्र बनाया गया था।

अभ्यर्थियों के अनुसार प्रयोगशाला परिचालक भर्ती परीक्षा में छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट कौन-सा है तथा रतनपुर के रामटेकरी मंदिर का निर्माण किस शासक ने कराया जैसे स्थानीय महत्व के प्रश्न पूछे गए, जिन्हें देखकर परीक्षार्थियों के चेहरे खिल उठे। हालांकि कार्यपालिका, खेल, गणित और तार्किक क्षमता से जुड़े प्रश्न अपेक्षा से अधिक कठिन और समय लेने वाले रहे। सहायक ग्रंथपाल परीक्षा में भी सामान्य अध्ययन और विश्लेषणात्मक प्रश्नों ने अभ्यर्थियों की तैयारी की कड़ी परीक्षा ली। कुल मिलाकर दोनों परीक्षाओं का स्तर मध्यम से कठिन माना गया।

केंद्रों में दिखा नीट के बाद बदला सुरक्षा माडल

नीट पेपर लीक के बाद भर्ती परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सख्त दिखाई दे रही है। बिलासपुर के अधिकांश परीक्षा केंद्रों पर रिपोर्टिंग समय से पहले गेट खोल दिए गए। प्रत्येक अभ्यर्थी की पहचान सत्यापित की गई। हैंड स्कैनर से जांच, संदिग्ध वस्तुओं पर रोक, लगातार निगरानी और परीक्षा कक्ष में अनुशासन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। कई केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात रहे।

गणित ने समय खा लिया, सामान्य ज्ञान रहा संतुलित

परीक्षार्थियों के अनुसार सामान्य ज्ञान और छत्तीसगढ़ से जुड़े प्रश्न अपेक्षाकृत आसान थे, लेकिन गणित, तार्किक क्षमता और कार्यपालिका संबंधी प्रश्नों ने समय अधिक लिया। कई अभ्यर्थियों ने बताया कि अंतिम मिनटों में उन्हें कई प्रश्न बिना हल किए छोड़ने पड़े। उनका मानना रहा कि प्रश्नपत्र ज्ञान से अधिक समय प्रबंधन और विश्लेषण क्षमता की भी परीक्षा ले रहा था।

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परीक्षार्थियों ने साझा किया परीक्षा केंद्र का अनुभव

रायगढ़ से आए एक अभ्यर्थी रामकुमार कैवर्त ने बताया कि केंद्र पर सुरक्षा जांच इतनी सख्त थी कि हर अभ्यर्थी की अलग-अलग जांच की गई। वहीं मुंगेली की सीमा यादव एक अभ्यर्थी ने कहा कि प्रक्रिया में थोड़ा समय जरूर लगा, लेकिन इससे परीक्षा की पारदर्शिता पर भरोसा बढ़ा। अधिकांश अभ्यर्थियों ने माना कि निष्पक्ष परीक्षा के लिए ऐसी व्यवस्था आवश्यक है।

इन कारणों से कठिन माना गया दोनों परीक्षाओं का प्रश्नपत्र

  • गणित के प्रश्न लंबे और समय लेने वाले रहे।
  • कार्यपालिका और खेल से जुड़े प्रश्नों ने उलझाया।
  • विश्लेषण आधारित प्रश्नों की संख्या अपेक्षा से अधिक रही।
  • छत्तीसगढ़ आधारित प्रश्नों ने स्थानीय अभ्यर्थियों को राहत दी।
  • समय प्रबंधन दोनों परीक्षाओं में सफलता का सबसे बड़ा आधार साबित हुआ।