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छत्तीसगढ़ के 152 गांवों के किसानों के लिए खुशखबरी, फसल विविधीकरण का मिलेगा लाभ, बढ़ेगी किसानों की आय

महानदी, पैरी, सोंढूर और खारून नदी किनारे बसे 152 गांवों के करीब 38 हजार किसानों के लिए जिला प्रशासन फसल विविधीकरण की व्यापक कार्ययोजना तैयार कर रहा है...और पढ़ें

By Rammilan sahuEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 04 Sep 2026 10:34:04 PM (IST)Updated Date: Fri, 04 Sep 2026 10:34:04 PM (IST)
छत्तीसगढ़ के 152 गांवों के किसानों के लिए खुशखबरी, फसल विविधीकरण का मिलेगा लाभ, बढ़ेगी किसानों की आय
30 हजार हेक्टेयर रकबे की बदलेगी सूरत।

HighLights

  1. 38 हजार किसानों को धान के साथ सब्जी
  2. दलहन-तिलहन फसलों से जोड़ने की योजना
  3. 30 हजार हेक्टेयर रकबे की बदलेगी सूरत

नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। महानदी, पैरी, सोंढूर और खारून नदी किनारे बसे 152 गांवों के करीब 38 हजार किसानों के लिए जिला प्रशासन फसल विविधीकरण की व्यापक कार्ययोजना तैयार कर रहा है। लंबे समय से नदी किनारे अवैध रेत उत्खनन के कारण सब्जी खेती प्रभावित होने से अनेक किसान अतिरिक्त आय के साधन से दूर हो गए हैं।

पहले नदी किनारे सब्जी, तरबूज-खरबूज सहित अन्य फसल लेकर किसान धान के साथ अतिरिक्त आमदनी अर्जित करते थे, लेकिन रेत उत्खनन से नदी तट की भूमि प्रभावित होने के बाद कई परिवारों की आय धान तक सीमित हो गई है। कुछ परिवार रोजगार के लिए दूसरे स्थानों पर पलायन भी कर चुके हैं।


नए विकल्प विकसित करने की तैयारी

महानदी किनारे अछोटा, कोलियारी, तेंदूकोन्हा, अमेठी, कलारतराई, खरेंगा और परसुली समेत 97 गांवों में पहले किसान नदी किनारे सब्जी खेती करते थे। प्रशासन अब इन क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खेती के नए विकल्प विकसित करने की तैयारी में है। योजना से 30,841.96 हेक्टेयर कृषि रकबा लाभान्वित होगा। इनमें महानदी किनारे 97, पैरी के 18, सोंढूर के 23 और खारून के 14 गांव शामिल हैं।

धान के साथ बढ़ेंगे खेती के विकल्प

सितंबर-अक्टूबर से फसल विविधीकरण अभियान शुरू करने की कार्ययोजना है। भूमि की ऊंचाई, जलभराव, मिट्टी, जल निकासी और सिंचाई के आधार पर फसल प्रणाली विकसित की जाएगी। नवंबर-दिसंबर में किसानों की मांग और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार दलहन-तिलहन के बीज तथा औषधीय पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी है। अधिक जलभराव वाले क्षेत्रों में धान प्रमुख फसल रहेगी।

कटाई के बाद भूमि की क्षमता के अनुसार रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। अच्छी जल निकासी वाली भूमि में धान के बाद मक्का, मूंग-उड़द और ऊंची भूमि में दलहन-तिलहन, सब्जी, औषधीय फसल, फलदार पौधे व चारा आधारित माडल विकसित किए जाएंगे। अति निम्न और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में धान के साथ खस, बच और लेमन ग्रास जैसी औषधीय फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

5,458 हेक्टेयर में रबी फसलों का प्रस्ताव

नदी किनारे गांवों में 5,458.90 हेक्टेयर में रबी फसलों के विस्तार का प्रस्ताव है। इसमें चना 3,244.10, गेहूं 662.80, सरसों 472.50, मक्का 243.90, उड़द 214.80, मूंग 178.70, मूंगफली 142.20, सूरजमुखी 39 और औषधीय फसल 110.60 हेक्टेयर शामिल है।

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जल संरक्षण के साथ खेती को आधार

फसल विविधीकरण के साथ जल संरक्षण के कार्य भी होंगे। महानदी किनारे धमतरी व मगरलोड विकासखंड में 36 नालों की सफाई, 19 फार्म पांड, 17 सोकपिट तथा मगरलोड में सात चेकडैम-एमआईटी सुधार प्रस्तावित हैं। 75 तटवर्ती गांवों में घास और पौधरोपण किया जाएगा। खेत से नाले और नाले से नदी तक पानी के अनियंत्रित बहाव को रोकने माइक्रो-वाटरशेड आधारित कार्ययोजना बनेगी।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि नदी किनारे खेती की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। स्थानीय भू-आकृति और पानी की उपलब्धता के आधार पर गांववार माइक्रो-प्लान जरूरी है। फसल विविधीकरण का उद्देश्य किसानों को जमीन के अनुरूप अधिक विकल्प देना, खेती का जोखिम घटाना और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है।