
नईदुनिया प्रतिनिधि, कांकेर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के वनांचल क्षेत्रों में वन्यजीवों की रिहायशी बस्तियों में आमद ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। कोरर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चिल्हाटी और आसपास के इलाकों में एक जंगली भालू का लगातार आतंक बढ़ रहा है। बीती रात करीब साढ़े 11 बजे गांव में घुसे विशालकाय जंगली भालू ने जमकर उत्पात मचाया और एक ही रात में सिलसिलेवार ढंग से तीन अलग-अलग घरों और दुकानों को अपना निशाना बनाकर क्षति पहुंचाई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोजन की तलाश में जंगल से भटके भालू ने सबसे पहले ग्रामीण कुमीन उमाशंकर टेमुन्न की परचून दुकान पर धावा बोला। भालू ने अपने पंजों और ताकत से दुकान का मजबूत दरवाजा तोड़ दिया और भीतर घुसकर काउंटर में रखे बिस्कुट व चॉकलेट के पैकेट फाड़कर चट कर दिए। इसके बाद भालू पास ही स्थित सोनाई धनेलिया के घर में घुस गया। वहां उसने घर के भीतर बने मंदिर में पूजा के लिए रखे शुद्ध घी और तेल को पूरी तरह चट कर दिया। उत्पात यहीं नहीं थमा, भालू ने मोदक यदु के घर का मुख्य दरवाजा भी तोड़ डाला। अचानक दरवाजों पर हुए हमलों और भारी आवाज से पूरा परिवार सहम गया।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, इस क्षेत्र में भालू की मौजूदगी और तोड़फोड़ की यह कोई पहली वारदात नहीं है। इससे कुछ दिन पूर्व कोरर बस स्टैंड पर स्थित ओम प्रकाश सिन्हा के ठेले और दुकान को भी इसी भालू ने पूरी तरह तोड़कर तहस-नहस कर दिया था, जिससे उस छोटे व्यवसायी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। लगातार हो रही इन घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि भालू अब मानव बस्तियों का आदी हो चुका है और भोजन की सुलभ उपलब्धता के चलते बार-बार लौट रहा है।
रिहायशी बस्तियों में जंगली भालू के इस तरह बेखौफ घुसने से ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं। अंधेरा होते ही लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं और रात भर जागकर लाठी-डंडों के सहारे पहरा दे रहे हैं। किसी भी समय बड़ी जनहानि या अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है। पीड़ित ग्रामीणों ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में रात के समय गश्त बढ़ाई जाए और इस उत्पाती भालू को पकड़ने के लिए तत्काल गांव के पास लोहे का पिंजरा लगाया जाए।