
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबाः तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य अब समापन की ओर है। कोरबा वन मंडल में 53 हजार 600 मानक बोरा पत्ता संग्रहित करने का लक्ष्य था। जिसके विरुद्ध 81 प्रतिशत पत्ता संग्रहित किया गया। इसी तरह कटघोरा वन मंडल में 76 हजार 300 मानक बोरा के विरुद्ध 76 प्रतिशत पत्ता संग्रहण हुआ है। दोनों वन मंडल के 728 फड़ बनाए गए थे।
बेमौसम वर्षा की वजह से पत्तों का उपज प्रभावित हुआ है। अभी भी मौसमी उतार चढ़ाव जारी है। इस वजह से दोनों वन मंडलों में पत्तों का संग्रहण लक्ष्य पूरा हो पाना मुश्किल हो गया है। अब तक संग्रहित पत्तों का का आकलन किया जाए तो बीते वर्ष की तुलना में यह 20 हजार 39 मानक बोरा अधिक है। तेंदूपत्ता की खरीदी में तत्काल भुगतान की प्रक्रिया के कारण पत्ता तोड़ाई को लेकर संग्राहकों में प्रतिस्पर्धा बनी हुई।
पिछले कुछ सालों से संग्रहण के समय मौसम में बदलाव के साथ वर्षा व तेज हवा से काम बाधित होता रहा। बीते वर्ष की तुलना में इस बार इस इसका असर अधिक रहा। कोरबा वन मंडल 38 समितियों में 280 फड़ बनाए गए हैं। इसी तरह कटघोरा में 44 समितियों के लिए 482 फड़ बनाए गए हैं। अंतिम चरण के तोड़ाई के अमानक पत्तों की आवाज को देखते हुए फड़ मुंशियों पत्तों का आकलन शुरू कर दिया था।
प्रति वर्ष पत्तों के खराब होने का हवाला देकर पांच गड्डी अतिरिक्त पत्ते सरा के नाम पर ली जाती थी। इस बार इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए गांव-गांव सरा न देने मुनादी कराई गई थी। तोड़ाई काम पूरा होने के बाद सूखे पत्तों को गोदामों में पहुंचाया जाने लगा है। तेंदूपत्ता संग्रहण के नोडल अधिकारी एसएस कंवर ने बताया कि मौसमी आपदा से हरे पत्तों को सुरक्षित रखने के लिए फड़ों आसपास वैकल्पिक व्यवस्था जा रही है। अब तक संग्रहित पत्तो में सूख चुके 60 प्रतिशत पत्तों को गोदाम में संग्रहित कर लिया गया है। सूखे पत्तों की सुरक्षा के लिए गोदामों में अग्निशमन यंत्रों व्यापक इंतजाम किया गया है। I
हाथी, भालू और जंगली सूअर के डर का असर-
कटघोरा व कोरबा के जंगलों में हाथियां का प्रभाव पहले से ही है। कोरबा वन मंडल के गुरमा व कुदमुरा में हाथियों के विचरण के कारण निर्धारित फड़ों में कम समय ही पत्तों की खरीदी हुई। इसी तरह कोरबा वन मंडल के विभिन्न स्थानों जंगली सुअर और भालू के विचरण की वजह फड़ों से लगे वन क्षेत्र पत्तों की कम तोड़ाई हुई हुई। कटघोरा के जटगा वन क्षेत्र में हाथी के विचरण से लोगों को जंगल की ओर न जाने के लिए सकर्त किया गया । इससे भी संग्रहण प्रभावित हुआ है।
संग्रहणकर्ता को बोनस का भी मिलेगा लाभ-
खास बात यह है कि हितग्राही जितनी अधिक मात्रा में पत्तों का संग्रहण करते हैं उन्हे बोनस राशि का उतना ही लाभ मिलता है। इस बार ग्राम विमलता के पत्ते सर्वाधिक कीमत में बिका है। कोई, ठाकरखेता, लेमरू के पत्तों की भी बढ़चढ कर बोली लगाई गई। यहां के पत्ते प्रति मानक बोरा 10 हजार रूपये से भी अधिक कीमत में बिके हैं। शासन ने पत्तों का दर 5,500 रूपये दर तय किया है। दोनों वन मंडलों में 99 हजार से भी अधिक संग्राहक परिवार पत्तों का संग्रहण करते हैं। संग्रहित परिवार के खातें में राशि भुगतान भी जारी है।
खेती और बच्चों की पढ़ाई में सहयोगी-
तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य मानसून आगमन के लभगभ माह भर पहले शुरु होता है। संग्रहण के एवज में मिलने वाली राशि से किसानों को खरीफ फसल के लिए खाद व बीज खरीदी करने के लिए आसानी होती है। इसी तरह जून माह से शुरू होने वाली शैक्षणिक सत्र में बच्चों की पढ़ाई के लिए भी संग्राहकों समस्या नहीं होती। संग्राहक परिवार बच्चों के लिए छात्रवृत्ति दिए जाने का भी प्रविधान है। दोनों वन मंडल में संग्राहक परिवार से जुड़े मेधावी छात्रों क जानकारी जुटाई जा रही, ताकि उन्हें छात्रवृत्ति की राशि प्रदान की जा सके।