
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा। गेवरा रोड-पेंड्रा रोड रेल कारिडोर से नई रेलपांत समेत अन्य उपकरण चोरी के मामले में पुलिस ने निर्माण कार्य में लगी कंपनी के ही दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि कर्मचारियों की मिलीभगत से ही रेलपांत व उपकरण का गबन किया गया है और कंपनी को चोरी की झूठी सुना दी गई। एक के बाद एक लोहा चोरी की बड़ी घटनाओं से पुलिस की नींद उड़ गई थी। कबाड़ चोरों के करामात की वजह से पुलिस की वर्दी दागदार हो रही थी।
रशियन हॉस्टल से 15 टन लोहे के पुल की चोरी के मामले में भी पुलिस पहले गंभीर नजर नहीं आई। मामले तूल पकड़ने पर फरार आरोपितों को अलग- अलग तीन किस्तों में पकड़ा। यह मामला शांत होता, इससे पहले रेल लाइन चोरी की गंभीर घटना सामने आ गई। शिवाकृति इंटरनेशनल लिमिटेड कंपनी ने बांकीमोंगरा एवं कटघोरा थाना में दो करोड़ के सामानों की चोरी की शिकायत कराई गई थी। अंतत: कटघोरा पुलिस ने इस मामले में पुलिस ने गबन का अपराध पंजीबद्ध कर निर्माण कार्य में लगी कंपनी के जेसीबी आपरेटर तेजबहादुर पटेल एवं राहुल सिंह मरकाम को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस का कहना है कि रेलवे साइड सिंघिया एवं सुतर्रा स्थित स्टोर से लोहे के स्लीपर एवं अन्य सामग्री गायब हो गई थी। जांच के दौरान कंपनी के कर्मचारियों, गार्डों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों से विस्तृत पूछताछ की गई। तब यह बात सामने आई कि किसी तरह की किसी भी प्रकार की हथियारबंद लूट या बाहरी डकैती की घटना नहीं हुई है। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपितों को जेल दाखिल कर दिया गया है।
आरोपित तो पकड़ा रहे, पर हाथ नहीं लग रहा सामान
पुलिस भले ही इस मामले में गबन का अपराध पंजीबद्ध कर दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया हो, पर चोरी गई सामानोंको बरामद करने में इस बार भी असफल रही। केवल दिखावे के लिए कुछ एंगल जब्त किए गए हैं। कंपनी का ही जेबीसी को गबन के लिए उपयोग करने का हवाला देते हुए जब्त कर लिया गया है।
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पुलिस ने यह बात स्वीकार की है कि 25,06,000 रुपये के सामानों की चोरी हुई है, पर बरामदगी के नाम पर हाथ खाली हैं। कमोवेश कुछ ऐसी ही स्थिति रशियन हास्टल के समीप लोहे के पुल की चोरी के मामले में भी पुलिस की स्थिति बनी। थोक के भाव से 17 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, पर 15 टन लोहे में केवल 1200 किलो लोहा ही हाथ लग सका था। सवाल यह उठता है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर लोहा आरोपतों ने कहा खपा दिया। वहां तक पुलिस अब तक क्यों नहीं पहुंच पाई है।