कोरबा में बड़ा बैंकिंग फ्रॉड... इंदिरा आवास योजना में 79 लाख का गबन, कियोस्क संचालक गौरव शुक्ला गिरफ्तार
जरूरतमंदों के आवास के लिए सरकारी राशि में 79 लाख रुपये के गबन के मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो रायपुर ने कियोस्क संचालक गौरव शुक्ला को ग ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 19 Apr 2026 10:19:11 PM (IST)Updated Date: Sun, 19 Apr 2026 10:19:11 PM (IST)
कोरबा में बड़ा बैंकिंग फ्रॉड... इंदिरा आवास योजना में 79 लाख का गबनHighLights
- इंदिरा आवास योजना के गबन मामले में EOW रायपुर ने की बड़ी गिरफ्तारी
- आरोपित गौरव शुक्ला ने गरीबों के 79 लाख रुपये अपने खातों में किए ट्रांसफर
- बैंक ऑफ इंडिया कोरबा में कियोस्क संचालन के दौरान किया गया बड़ा फ्रॉड
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा। जरूरतमंदों के आवास के लिए सरकारी राशि में 79 लाख रुपये के गबन के मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो रायपुर ने कियोस्क संचालक गौरव शुक्ला को गिरफ्तार किया। उसके विरुद्ध धारा 420, 421, 409, 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की संशोधित धाराओं के तहत मामला दर्ज है। जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपित ने इंदिरा आवास योजना के तहत गरीब हितग्राहियों के लिए आई राशि में हेराफेरी कर गबन किया। मामला वर्ष 2010-11 का है। कोरबा जिले के विभिन्न गांवों के लिए इंदिरा आवास योजना की राशि किश्तों में आई थी।
बैंक कर्मचारियों की आईडी का दुरुपयोग और धोखाधड़ी का तरीका
इस राशि को वर्ष 2017 में आरोपित गौरव शुक्ला 47 वर्ष, निवासी नंदबाग रूमगरा ने अपने खातों में स्थानांतरित कर लिया। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के भरोसे का फायदा उठाते हुए आरोपित ने उनके हिस्से की राशि हड़प ली। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपित बैंक ऑफ इंडिया, शाखा कोरबा में कियोस्क संचालक था। उसने निष्क्रिय पड़े हितग्राहियों के खातों को बैंक कर्मचारियों की स्टाफ आईडी का दुरुपयोग कर सक्रिय कराया। इसके बाद हितग्राहियों के आधार नंबरों की जगह अपने और अपने परिवार के सदस्यों के आधार नंबर जोड़ दिए। इस तरीके से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए राशि अपने खातों में ट्रांसफर करता रहा।
बैंकिंग सॉफ्टवेयर की खामियों का लाभ और ईओडब्ल्यू की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी ने बैंकिंग सॉफ्टवेयर की खामियों का भी फायदा उठाया। बिना आधार सत्यापन के लेन-देन और ऑटो लॉगआउट जैसी व्यवस्था न होने का उसने लाभ लिया। आधार जोड़ने की प्रक्रिया 10 अलग-अलग स्टाफ आईडी से करीब 620 बार की गई। इनमें से अधिकतर प्रविष्टियां बिना दस्तावेज सत्यापन के दर्ज की गईं। कुछ प्रविष्टियां कियोस्क ऑपरेटर आईडी से भी की गई हैं। मामले में अन्य संभावित भूमिका की भी जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपित को विशेष न्यायालय कोरबा ने 21 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
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