कोरबा में तारपीन तेल व्यवसायी के सेल्समेन ने किया 25 लाख रुपये का गबन
संचालक सुनील गुप्ता ने थक-हार कर स्वयं पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के पास मिलकर पुनः सारी बात बताया तो एसपी ने मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को द ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 25 Nov 2024 11:37:21 PM (IST)Updated Date: Mon, 25 Nov 2024 11:37:21 PM (IST)
HighLights
- पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कुसमुंडा पुलिस ने की कार्रवाई ।
- धोखाधड़ी की शिकायत लेकर थाना पहुंचने पर नहीं सुनी गई।
- मालिक की रिपोर्ट पर एफआइआर हुई है।
नईदुनिया न्यूज, कोरबा: शहर के एक तारपीन तेल के व्यवसायी को उसके सेल्समैन ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर 25 लाख रुपये का चूना लगाया है। सेल्समैन ने भरोसे का बेजा फायदा उठाते हुए बाजार में बेचे गए तारपीन का पैसा खुद उठाकर न सिर्फ हड़प लिया, बल्कि चोरी-छिपे बड़ी मात्रा में तारपीन की बिक्री भी कर दिया। एसपी के संज्ञान लेने उपरांत पीड़ित मालिक की रिपोर्ट पर एफआइआर हुई है।
दुरपा रोड निवासी सुभाष गुप्ता जो कि फर्म टेक इंडस्ट्रीज का मालिक है, लेकिन उक्त फर्म का संचालन उसका बड़ा भाई सुनील गुप्ता कर रहा है। कुसमुंडा थाना के अंतर्गत एसईसीएल के छह नंबर बेरियर बरमपुर के पास अपने निजी जमीन पर विगत कई साल से फर्म संचालित है। सुनील गुप्ता ने मार्केटिंग कार्य के लिए अपने पूर्व परिचित धीरज अग्रवाल को सेल्समैन के रूप में रखा था। धीरज कुछ माह तक तो ईमानदारी से कार्य करता रहा। फर्म का टर्नओवर बढ़ने लगा और तारपीन तेल का सेल्स मार्केट में बढ़ गया तब धीरज ने टेक इंडस्ट्रीज के द्वारा सप्लाई किए गए तारपीन (पेंट आयल) की राशि जो विभिन्न जिलों की दुकानों से प्राप्त हुई, उसमें से कुछ राशि तो संचालक को दिया और बाकी की राशि स्वयं और उसी फर्म में काम करने वाले भोला साहू के साथ मिलकर गबन कर लिया। कुछ दिनों के बाद जब संचालक को अपने गोदाम में स्टाक कम होने की जानकारी हुई, तो संचालक सुनील गुप्ता ने अपने स्तर पर पतासाजी किया। उसे कुछ दुकानदारों ने बताया कि तारपीन पेंट आयल की राशि धीरज को दे दिया है।
जानकारी लगी कि धीरज ने कई दुकानों से तारपीन (पेंट आयल) की राशि अपने परिवार के सदस्यों के खातों में भी डलवाया है। इंडस्ट्रीज के दस्तावेज खंगाले तब पता चला कि लगभग 25 लाख रुपये धीरज एवं उसके सहयोगी भोला साहू ने धोखाधड़ी करते हुए गबन कर दिया है। संचालक सुनील जब अपने साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत लेकर थाना पहुंचा तो उसकी शिकायत नहीं सुनी गई। तब उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय जाकर एसपी के नाम आवेदन दिया। इस आवेदन पर जांच हुई।