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छत्तीसगढ़ में चार साल बाद भी छह नए जिलों को कलेक्ट्रेट भवन का इंतजार, किराए के भवन में संचालित हो रहे भवन

छत्तीसगढ़ के छह नवगठित जिलों में संयुक्त जिला कार्यालयों का निर्माण कार्य चार साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। गौरेला पेंड्रा मरवाही समेत छह नए जिलों क...और पढ़ें

By Satish PandeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sun, 23 Aug 2026 11:49:40 AM (IST)Updated Date: Sun, 23 Aug 2026 11:51:35 AM (IST)
छत्तीसगढ़ में चार साल बाद भी छह नए जिलों को कलेक्ट्रेट भवन का इंतजार, किराए के भवन में संचालित हो रहे  भवन
गौरेला में गुरुकुल विद्यालय परिसर में संचालित गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का मुख्य जिला कार्यालय (कलेक्ट्रेट)।

HighLights

  1. छह नए जिलों में कलेक्ट्रेट भवन निर्माण अधूरा
  2. चार साल से किराए के भवनों में कामकाज
  3. विभाग के अनुसार अक्टूबर तक निर्माण पूरा होगा

राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर। प्रदेश के छह नवगठित जिलों में संयुक्त जिला कार्यालयों(कलेक्ट्रेट) के अपने भवन का इंतजार अब लंबा होता जा रहा है। करीब चार वर्षों से इन जिलों के कार्यालय किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। प्रत्येक जिला कार्यालय भवन के निर्माण के लिए करीब 19 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही 10 फरवरी 2020 को प्रदेश का नया जिला बना था। इसके बाद वर्ष 2022 में मनेंद्रगढ़, सक्ती, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले अस्तित्व में आए। नए जिलों के गठन से प्रशासनिक व्यवस्था तो शुरू हो गई, लेकिन स्थायी कार्यालय भवन अब भी अधूरे हैं। ऐसे में सरकारी कार्यालयों को किराए के या दूसरे भवनों में संचालित करना पड़ रहा है।


किराए के भवनों में चल रहा काम

नए जिलों में कलेक्ट्रेट के लिए स्थायी भवन नहीं होने से विभागों को अलग-अलग किराए के भवनों में जगह लेनी पड़ रही है। इससे कार्यालयों के बीच समन्वय और आम लोगों की सुविधा से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। एक ही परिसर में विभिन्न विभागों के कार्यालय होने से जहां लोगों को अधिकारियों तक पहुंचने में सहूलियत होती है, वहीं किराए के भवनों में यह सुविधा सीमित रहती है।

करोड़ों की स्वीकृति, फिर भी इंतजार

छह नए जिलों में संयुक्त जिला कार्यालय भवन का निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी द्वारा किया जा रहा है। प्रत्येक भवन के लिए 18.75 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बावजूद निर्माण की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। चार वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी भवनों का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। नए जिलों में प्रशासनिक ढांचा खड़ा करने के साथ स्थायी अधोसंरचना उपलब्ध कराने की जरूरत अब भी बनी हुई है। हालांकि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि सभी संयुक्त जिला कार्यालय भवनों का कार्य प्रगति पर है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही कार्यालय भवन का सिविल कार्य पूरा हो चुका है। फिनिशिंग का काम चल रहा है। 30 अक्टूबर तक सभी भवनों का निर्माण कार्य पूरा होने की संभावना है।