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छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 लागू: जबरन मतांतरण पर अब उम्रकैद की सजा और भारी जुर्माना

छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध और जबरन मतांतरण को रोकने के लिए 'धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026' के नियमों को राजपत्र में प्रकाशित कर लागू कर दिया है।

By Sandeep TiwariEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 09:42:20 AM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 09:42:20 AM (IST)
छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 लागू: जबरन मतांतरण पर अब उम्रकैद की सजा और भारी जुर्माना
जबरन मतांतरण पर अब नए कानून में होगी कार्रवाई (AI Generated Image)

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ में 1968 का पुराना धर्म स्वातंत्र्य कानून बदला
  2. जबरन मतांतरण पर 10 साल से आजीवन कारावास का प्रावधान
  3. केवल मतांतरण के उद्देश्य से हुए अंतरधार्मिक विवाह शून्य होंगे

राज्य ब्यूरो, रायपुर। प्रदेश में अवैध और जबरन मतांतरण की गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने 'धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026' के नियमों का राजपत्र में प्रकाशन कर दिया है। इसके साथ ही यह नया कानून राज्यभर में प्रभावी हो गया है। नया अधिनियम 1968 के पुराने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम का स्थान लेगा। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी मतांतरण विरोधी कानून को बेहद कड़ा रूप दिया गया है।

विधानसभा से राजपत्र तक का सफर

उल्लेखनीय है कि इस विधेयक को 19 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ विधानसभा से मंजूरी मिली थी, जिसके बाद 8 अप्रैल को राज्यपाल ने इस पर अपने हस्ताक्षर किए। कानून की मूल अधिसूचना 10 जुलाई 2026 को जारी हुई थी, जबकि इसके विस्तृत नियमों को 4 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया है।


अंतरधार्मिक विवाह और मतांतरण की प्रक्रिया

नए प्रावधानों के तहत यदि कोई धर्मगुरु या व्यक्ति अंतरधार्मिक विवाह कराता है, तो उसे समारोह से कम से कम 8 दिन पूर्व सक्षम प्राधिकारी को घोषणापत्र देना अनिवार्य होगा। जांच में यदि शादी का मुख्य उद्देश्य केवल मतांतरण पाया गया, तो विवाह को अवैध घोषित कर दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, स्वैच्छिक मतांतरण के लिए व्यक्ति को प्राधिकृत अधिकारी के पास आवेदन देना होगा, जिसकी सूचना स्थानीय पंचायत और थाने के बोर्ड पर 30 दिनों के दावे-आपत्तियों के लिए लगाई जाएगी। आवेदन के 90 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी न होने पर वह स्वतः निरस्त माना जाएगा। हालांकि, अपने मूल पैतृक धर्म में वापसी (घर वापसी) को मतांतरण की श्रेणी में नहीं रखा गया है।

सजा और जुर्माने के सख्त प्रावधान

  • सामान्य मामले: 7 से 10 वर्ष का कारावास और न्यूनतम ₹5 लाख जुर्माना।
  • विशेष श्रेणी (नाबालिग, महिला, दिव्यांग, SC, ST, OBC): 10 से 20 वर्ष तक की जेल और न्यूनतम ₹10 लाख जुर्माना।
  • सामूहिक मतांतरण: 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और न्यूनतम ₹25 लाख जुर्माना।
  • ऑनलाइन/डिजिटल प्रलोभन: डिजिटल माध्यमों से बहला-फुसलाकर कराया गया मतांतरण भी संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होगा।

तेज सुनवाई के लिए हर जिले में विशेष न्यायालय गठित किए जाएंगे। उप-मुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अवैध गतिविधियों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और कानून का कड़ाई से पालन कराएगी।