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छत्तीसगढ़ में गिरदावरी का नया नियम: फसल बदलने पर खेत की फोटो अपलोड करना अनिवार्य, सात स्तरों पर जांच

छत्तीसगढ़ में इस बार खरीफ फसलों की गिरदावरी पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगी। राजस्व विभाग ने फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सात-स्तरीय भौतिक सत्यापन लागू कि...और पढ़ें

By Abhishek RaiEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 11:09:38 AM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 12:17:21 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में गिरदावरी का नया नियम: फसल बदलने पर खेत की फोटो अपलोड करना अनिवार्य, सात स्तरों पर जांच
खरीफ फसलों का डिजिटल 'एक्स-रे' (फाइल फोटो)

HighLights

  1. फसल बदलने या खेत खाली रहने पर फोटो खींचना जरूरी
  2. 20 सितंबर तक गिरदावरी और भुईयां सॉफ्टवेयर में प्रविष्टि होगी
  3. दावों-आपत्तियों के बाद 30 सितंबर तक अंतिम रिकार्ड अपडेट होंगे

नईदुनिया, प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश में इस वर्ष खरीफ फसलों की गिरदावरी (फसल निरीक्षण) प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। राज्य सरकार और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीदी को पूरी तरह से पारदर्शी और विवादमुक्त बनाने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में, प्रदेश में अब खरीफ फसलों की गिरदावरी का कार्य पूरी तरह डिजिटल निगरानी और बेहद कड़े सत्यापन के दायरे में किया जाएगा।

धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के साथ-साथ प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के अंतर्गत खरीदी जाने वाली उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली और अरहर की सुचारू खरीदी के लिए सभी जिला कलेक्टरों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि गिरदावरी में शत-प्रतिशत डिजिटल और मैन्युअल तरीकों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यदि इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही, गलत डेटा प्रविष्टि या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


सात-स्तरीय भौतिक सत्यापन प्रणाली से रुकेगी धांधली

गिरदावरी को पूरी तरह से त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में पहली बार सात-स्तरीय भौतिक सत्यापन की नई व्यवस्था लागू की गई है। इस प्रणाली के तहत:

  • पटवारी अपने निर्धारित हल्के के 100 प्रतिशत कृषि रकबे का सत्यापन करेंगे।
  • राजस्व निरीक्षक (आरआई) और कृषि विस्तार अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के 25-25 प्रतिशत रकबे का निरीक्षण करेंगे।
  • तहसीलदार और नायब तहसीलदार 10 प्रतिशत रकबे की जांच करेंगे।
  • अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) 5 प्रतिशत और जिला स्तरीय अधिकारी 1 प्रतिशत रकबे का औचक निरीक्षण करेंगे।
  • संभाग और राज्य स्तर के अधिकारी भी 0.1 प्रतिशत रकबे की जांच करेंगे, ताकि किसी स्तर पर चूक न हो।

तय की गई अहम समय-सीमा

शासन ने गिरदावरी कार्य को समय पर पूरा करने के लिए एक सख्त कैलेंडर भी निर्धारित किया है। अधिकारियों को 20 सितंबर तक गिरदावरी का कार्य, 'भुईयां' साफ्टवेयर में डेटा प्रविष्टि और त्रुटि सुधार का कार्य पूरा करना होगा। इसके बाद, 25 सितंबर को ग्रामवार फसल क्षेत्राच्छादन का प्रारंभिक डेटा प्रकाशित किया जाएगा। किसानों से प्राप्त दावा-आपत्तियों के निराकरण के बाद, 30 सितंबर तक अंतिम संशोधन कर सभी रिकार्ड अपडेट कर दिए जाएंगे।

फसल बदलने पर तस्वीर खींचना हुआ अनिवार्य

नई व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी किसान ने अपने खेत में धान के स्थान पर कोई अन्य फसल बोई है या अपना खेत खाली छोड़ दिया है, तो इसके लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। ऐसी स्थिति में पटवारी और राजस्व निरीक्षक को संबंधित खेत का खसरा-वार फोटो खींचकर मोबाइल एप पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। रिकार्ड और खेत की वास्तविक स्थिति में कोई अंतर मिलने पर मैदानी अमले के साथ-साथ पर्यवेक्षण अधिकारियों की भी सीधे जवाबदेही तय की जाएगी।

गांव-गांव में मुनादी और अधिकारियों की नियमित समीक्षा

ग्रामीणों और किसानों को इस नई गिरदावरी प्रक्रिया की सटीक जानकारी देने के लिए गांव-गांव में कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराई जाएगी। जांच और गिरदावरी के दौरान पारदर्शिता के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसानों की मौके पर मौजूदगी अनिवार्य रहेगी। इसके अलावा, संभागीय आयुक्त और भू-अभिलेख संचालक हर 15 दिनों में गिरदावरी अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगे। सरकार का मुख्य लक्ष्य फसलों का सटीक डिजिटल रिकार्ड तैयार करना है, ताकि समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे।