नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। भर्ती और व्यावसायिक परीक्षाओं में धांधली करना अब भारी पड़ेगा। विधानसभा में शुक्रवार को पेपर लीक और नकल माफिया पर नकेल कसने के लिए छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक-2026 को सर्वसम्मति से पारित किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा पेश विधेयक को सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने सहमति दी।
लोक सेवा प्राधिकरण और सख्त सजा का प्रावधान
इस नए कानून के तहत लोक सेवा प्राधिकरण का गठन होगा, जो कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी), व्यापमं सहित राज्य सरकार के विभाग व उनके अधीनस्थ कार्यालय या सार्वजनिक उपक्रमों की परीक्षाओं की मॉनिटरिंग करेगा। नए कानून के तहत यदि कोई संस्थान, प्रबंधन या सेवा प्रदाता प्रश्न पत्र लीक, धोखाधड़ी में लिप्त पाया जाता है, तो उस पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना और 10 साल की सजा हो सकती है।
तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती करेगा कर्मचारी चयन मंडल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा पेश छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक, 2026 भी पारित किया गया। इस कानून के माध्यम से राज्य में छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की स्थापना की जाएगी, जो तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को एकीकृत, पारदर्शी और समयबद्ध बनाएगा।
परीक्षाओं में धांधली पर ऐसे सख्ती
प्रश्नपत्र लीक करना, लीक करने का प्रयास, डमी (फर्जी) अभ्यर्थी बैठाना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से नकल करना अब दंडनीय अपराध होगा।
सामान्य मामलों में तीन से 10 वर्ष तक की जेल और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
यदि नकल या पेपर लीक किसी संगठित गिरोह द्वारा किया जाता है, तो जुर्माना एक करोड़ रुपये तक हो सकता है।
संगठित अपराध की स्थिति में दोषी व्यक्तियों और संस्थाओं की संपत्ति जब्त (कुर्क) की जा सकेगी।
परीक्षार्थियों के लिए नियम
नकल या अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले अभ्यर्थी का परीक्षा परिणाम निरस्त कर दिया जाएगा।
दोषी पाए जाने पर परीक्षार्थी को एक वर्ष से अधिक के लिए किसी भी भर्ती परीक्षा से प्रतिबंधित किया जा सकेगा।
जांच और सुरक्षा तंत्र
इन अपराधों की गंभीरता को देखते हुए, जांच उप निरीक्षक से नीचे के रैंक का अधिकारी नहीं करेगा।
आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार इन मामलों की जांच किसी विशेष जांच एजेंसी को भी सौंप सकती है।