
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। प्रदेश में स्वच्छता दीदियों की 10 दिवसीय हड़ताल को समाप्त कराने के लिए शासन ने अब बेहद सख्त रुख अपना लिया है। राज्य शहरी विकास अभिकरण यानी सूडा ने प्रदेश के सभी नगर निगम आयुक्तों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में हड़ताल जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाएं, ताकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सूडा की ओर से जारी किए गए पत्र में यह साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि अनुबंध की शर्तों के नियमों के अनुसार हड़ताल में शामिल होने वाले स्व-सहायता समूहों के अनुबंध तुरंत समाप्त किए जा सकते हैं। इसके साथ ही संबंधित सदस्यों की सेवा समाप्ति की कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।
पत्र में यह भी कड़े शब्दों में चेताया गया है कि यदि हड़ताल के कारण किसी भी नगरीय निकाय क्षेत्र में सफाई व्यवस्था बाधित होती है, तो सीधे तौर पर संबंधित निकाय प्रमुख के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की ही होगी। सभी निकायों को हर हाल में सफाई व्यवस्था सुचारू रखने के निर्देश दिए गए हैं।
नगरीय निकायों के भीतर डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का पूरा कार्य मुख्य रूप से स्वच्छता दीदियों द्वारा ही संचालित किया जाता है। छत्तीसगढ़ स्वच्छता दीदी महिला व पुरुष महासंघ द्वारा अपना मानदेय बढ़ाए जाने की मुख्य मांग को लेकर एक अगस्त से लगातार हड़ताल की जा रही है।
जनवरी इस संबंध में अधिकारियों का पक्ष है कि स्वच्छता दीदियों के हितों का पूरा ध्यान रखते हुए जनवरी 2025 से उनका मासिक मानदेय 7,200 रुपये से बढ़ाकर 8,000 रुपये कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, सूखे कचरे के विक्रय से होने वाली पूरी आय भी स्वच्छता दीदियों को ही प्रदान की जाती है।
अधिकारियों का यह भी मानना है कि बार-बार की जाने वाली इस तरह की हड़तालों से स्वच्छता जैसी अत्यावश्यक और बुनियादी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होती हैं, जो कि सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। आम जनता से जुड़ी इस व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।