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Chattisgarh Diamond Discovery: महासमुंद में दो सौ टन बल्क के परीक्षण में मिले 5 हीरे, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में प्राकृतिक संसाधन की खोज

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा किए गए वैज्ञानिक अन्वेषण में बड़ी सफलता मिली है। बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक से 200 टन...और पढ़ें

By Paritosh DubeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Tue, 23 Jun 2026 11:33:51 AM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 11:33:51 AM (IST)
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Chattisgarh Diamond Discovery: महासमुंद में दो सौ टन बल्क के परीक्षण में मिले 5 हीरे, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में प्राकृतिक संसाधन की खोज
चमकते हीरों की प्रतीकात्मक तस्वीर। अर्काइव

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा की फेहरिस्त में एक और चमकता अध्याय जुड़ गया है। राज्य के महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में किए गए वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान हीरों की प्राप्ति ने न केवल प्रदेश के खनिज मानचित्र को विस्तार दिया है, बल्कि आर्थिक प्रगति की नई संभावनाएं भी जगा दी हैं। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा संचालित इस अन्वेषण में 200 टन बल्क सैंपल के प्रसंस्करण के बाद कुल पांच हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनमें जेम क्वालिटी के हीरे भी शामिल हैं। वैज्ञानिक मानकों के अनुसार, बल्क सैंपल में हीरों की प्राप्ति यह सिद्ध करती है कि संबंधित क्षेत्र में प्राथमिक स्रोत (किम्बरलाइट बॉडी) की उच्च संभावना है

औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे राज्य की औद्योगिक विकास नीति की सफलता करार दिया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे खनिजों का प्रमुख उत्पादक रहा है, लेकिन हीरों की खोज से प्रदेश की खनिज विविधता में एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। राज्य सरकार का लक्ष्य इन संसाधनों का वैज्ञानिक दोहन करना है ताकि स्थानीय स्तर पर उद्योग और रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकें। यह खोज न केवल राजस्व का नया स्रोत बनेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख खनिज आधारित औद्योगिक केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त बनाएगी।


लंबे समय से वैज्ञानिकों को थी उम्मीद

यह सफलता महज पांच हीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस भूगर्भीय संभावना की पुष्टि करती है, जिसकी उम्मीद वैज्ञानिक लंबे समय से कर रहे थे। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग और ड्रिलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर यह परिणाम हासिल किया गया है। वर्तमान में इन हीरों को एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा गया है।

प्रारंभिक संकेत बनेंगे भविष्य का आधार

विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रारंभिक संकेत भविष्य में व्यापक अन्वेषण कार्यों का आधार बनेंगे। आगामी समय में इस क्षेत्र की वास्तविक खनिज क्षमता का सटीक आकलन किया जाएगा, जिससे विस्तृत खनन कार्य और निवेश की संभावनाओं का रास्ता साफ होगा। प्रदेश सरकार इस क्षेत्र में पारदर्शी प्रबंधन और मूल्य संवर्धन इकाइयों को बढ़ावा देने की योजना बना रही है, ताकि हीरा उद्योग राज्य के विकास का एक प्रमुख इंजन साबित हो सके।

छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर हुआ अन्वेषण

छत्तीसगढ़ में हीरा खनिजीकरण की संभावनाएं लंबे समय से चर्चा में रही हैं। इससे पूर्व गरियाबंद जिले के देवभोग (मैनपुर) क्षेत्र में किम्बरलाइट पाइप्स की खोज के बाद प्रदेश का नाम हीरा उत्पादक राज्यों की सूची में शामिल हुआ था। वर्ष 2000 से पहले और उसके बाद के सर्वेक्षणों में पेयलीखंड (Payalikhand) और कोदौमाली (Kodaomali) खदानों से उच्च गुणवत्ता वाले हीरे प्राप्त किए जा चुके हैं। देवभोग क्षेत्र में अब तक हुए सर्वेक्षणों में कई किम्बरलाइट पाइपों की पहचान हुई है। महासमुंद की यह नई खोज अब छत्तीसगढ़ के हीरा अन्वेषण को देवभोग से आगे बढ़ाकर एक नए विस्तार की ओर ले जा रही है।