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ईडी का दावा: डीएमएफ घोटाले के लाइजनर सतपाल को मिले 31 करोड़, सीजीपीएससी में उत्कर्ष- विकास ने वसूले तीन करोड़

प्रवर्तन निदेशालय ने छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ घोटाले में सतपाल सिंह चाबड़ा को गिरफ्तार किया है, जिन्हें 31 करोड़ रुपये कमीशन मिलने का आरोप है। इसके ...और पढ़ें

By Satish PandeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Wed, 02 Sep 2026 10:52:02 PM (IST)Updated Date: Thu, 03 Sep 2026 07:30:36 AM (IST)
ईडी का दावा: डीएमएफ घोटाले के लाइजनर सतपाल को मिले 31 करोड़, सीजीपीएससी में उत्कर्ष- विकास ने वसूले तीन करोड़
प्रवर्तन निदेशालय की र्कावाई की प्रतीकात्मक तस्वीर। अर्काइव

HighLights

  1. डीएमएफ घोटाले में सतपाल सिंह छाबड़ा से पूछताछ जारी
  2. छाबड़ा को मिला 31 करोड़ रुपये कमीशन, ईडी का दावा
  3. सीजीपीएससी घोटाले में उत्कर्ष और विकास ने वसूले 3 करोड़

राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड और सीजीपीएससी घोटाले में मनी लॉडरिंग से जुड़ी जांच तेज कर दी है। डीएमएफ कमीशनखोरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने सतपाल सिंह चाबड़ा को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। एजेंसी का दावा है कि डीएमएफ से जुड़े सप्लाई कार्यों में कमीशन के जरिए छाबड़ा को करीब 31 करोड़ रुपये मिले थे। उसे सिंडिकेट का मुख्य लाइजनर और वित्तीय समन्वयक बताया गया है। उसे पांच दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।

ईडी के अनुसार सतपाल चाबड़ा सप्लाई आधारित डीएमएफ कार्यों की पहचान करने, चयनित वेंडरों के बीच काम बांटने, वर्क आर्डर जारी कराने और भुगतान करवाने में भूमिका निभाता था। आरोप है कि वह वेंडरों से कमीशन वसूलकर सिंडिकेट के सदस्यों के बीच रकम के बंटवारे में भी शामिल था।


डीएमएफ में आए 9188 करोड़ रुपये

जांच एजेंसी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य के विभिन्न जिलों को डीएमएफ ट्रस्ट के तहत करीब 9188.20 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। आरोप है कि इस राशि का एक हिस्सा निर्धारित उद्देश्यों से हटाकर ऐसे सप्लाई कार्यों में लगाया गया, जिनमें कीमत बढ़ाने और कमीशन निकालने की गुंजाइश थी।

अन्य रास्तों से हुआ बंदरबांट

ईडी का दावा है कि डीएमएफ की बड़ी राशि राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से रूट की गई। रेट कांट्रेक्ट होल्डर संस्थाओं के पक्ष में जारी खरीद आदेशों की बेस वैल्यू पर एजेंट और लाइजनर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूलते थे। इसमें सरकारी अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक रकम पहुंचाए जाने का भी आरोप है।

खातों और बयानों से जुड़ी 31 करोड़ की कड़ी

बैंक खातों के विश्लेषण और छाबड़ा से पूछताछ में करीब 31 करोड़ रुपये की कमीशन राशि मिलने की जानकारी सामने आई। यह रकम उसके परिवार के सदस्यों, एचयूएफ और उसके नियंत्रण वाली संस्थाओं के खातों में भी पहुंची। इस मामले में सितंबर 2025 में भी ईडी ने कई ठिकानों पर तलाशी ली थी। अब छाबड़ा से एजेंसी वेंडरों, अधिकारियों, भुगतान प्रक्रिया और कथित कमीशन नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है।

सीजीपीएससी में उत्कर्ष और विकास ने अभ्यर्थियों से वसूले तीन करोड़

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीजीपीएससी की वर्ष 2020-21 की राज्य सेवा परीक्षाओं में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की जांच में दावा किया है कि कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर और डाॅ. विकास चंद्राकर ने चयन का भरोसा देकर अभ्यर्थियों से तीन करोड़ रुपये से अधिक की रकम कमाई है। इसमें करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को सौंपे गए। ईडी अब इस रकम के स्रोत, लेन-देन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

पांच ठिकानों पर हुई थी कार्रवाई

ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय ने एक सितंबर को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर के पांच ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। कार्रवाई में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकार्ड और संपत्ति संबंधी दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

बिचौलियों के जरिए प्रश्नपत्र पहुंचाने का आरोप

ईडी के अनुसार सीजीपीएससी की 2020 और 2021 की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र आरोपितों के रिश्तेदारों और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक निजी बिचौलियों के माध्यम से पहुंचाए गए। इसके बदले रकम लेकर डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे पदों पर चयन प्रभावित कराने का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि उत्कर्ष और डाॅ. विकास ने लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से नकद रकम वसूली।

मामा केके चंद्रवंशी के नाम का इस्तेमाल

जांच एजेंसी के मुताबिक उत्कर्ष ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक और अपने मामा केके चंद्रवंशी के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल अभ्यर्थियों को प्रभावित करने तथा रकम जुटाने में किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ एक ओएसडी के नाम और प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप भी जांच में सामने आया है।

मोबाइल और बैंक लेन-देन से जुड़े साक्ष्य

ईडी ने तीन जून को भी मामले में तलाशी ली थी। एजेंसी के अनुसार बयानों, उत्कर्ष के मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों के विश्लेषण से उसकी कथित भूमिका सामने आई। इसी आधार पर उसे पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का दावा है कि वह अपराध की आय जुटाने, रखने, लेयरिंग, हस्तांतरण और इस्तेमाल जैसी गतिविधियों में शामिल था।