बोतलों में टूट की छूट के नियम का फायदा उठाया, रिकार्ड में डैमेज असल में बाजार पहुंची शराब, सिलतरा गोदाम प्रभारी हटाया गया
रायपुर के सिलतरा वेयरहाउस में आबकारी विभाग द्वारा नष्ट करने के लिए चिन्हित शराब की पेटियां अवैध रूप से बाजार में खपाने का बड़ा मामला सामने आया है। एक्...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 23 Jun 2026 12:00:20 PM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 12:22:51 PM (IST)
शराब की बाेतलों का प्रतीकात्मक फोटो। अर्काइव नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। रायपुर की शराब दुकानों में ओवररेट बिक्री के साथ एक्सपायरी और नष्टीकरण सूची में शामिल शराब को बाजार में खपाने का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि आबकारी विभाग द्वारा नष्ट करने के आदेश के बावजूद सिलतरा वेयरहाउस से शराब की पेटियां बाहर निकालकर कोचियों और अवैध कारोबारियों के माध्यम से बेच दी गईं। विभाग ने 12 मई 2026 को 7,509 बाक्स में रखी 3,566 बोतलों को नष्ट करने का आदेश जारी किया था, लेकिन इनमें से बड़ी मात्रा बाजार तक पहुंच गई।
जांच के दायरे में टूट-फूट यानी ब्रेकेज छूट का खेल भी आया है। आरोप है कि परिवहन के दौरान बोतल टूटने का फर्जी रिकार्ड बनाकर शराब बाहर बेची जाती रही। शिकायतों के बाद सिलतरा वेयरहाउस की प्रभारी दीप मसीह को हटा दिया गया है। पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम ने विधानसभा में भी इस मामले को उठाते हुए राजनीतिक संरक्षण में भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया था। आबकारी विभाग ने अब पूरे मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
नष्टीकरण सूची की शराब बाजार में बेची
आबकारी विभाग पुराने और एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके स्टाक को नष्ट करने के आदेश जारी करता है। आरोप है कि सिलतरा वेयरहाउस में कागजों में नष्टीकरण दिखाकर वही शराब बाजार में खपाई गई। सेवन हिल्स बीयर की करीब 100 पेटियां, बडवाइजर की लगभग 200 पेटियां और इंपीरियल ब्लू शराब की करीब 100 पेटियों को क्षतिग्रस्त या एक्सपायरी बताकर बाहर बेचने का आरोप लगा है। यह स्टॉक अवैध कारोबारियों तक पहुंचने की बात भी सामने आई है।
ब्रेकेज छूट के नाम पर खेल
सरकार शराब परिवहन के दौरान संभावित टूट-फूट को देखते हुए सप्लायर कंपनियों को 0.25 प्रतिशत तक ब्रेकेज छूट देती है। यानी बोतल टूटने पर भी कंपनियों को पूरे स्टाक का भुगतान मिलता है। आरोप है कि इसी नियम का फायदा उठाकर ट्रकों से आई खेप में फर्जी टूट-फूट दिखाई जाती थी। बाद में वही स्टॉक वेयरहाउस से बाहर बेच दिया जाता था। सूत्रों का दावा है कि यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा था।
180 दिन वाले नियम से भी कमाई
छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड के नियमों के अनुसार छह महीने तक बिना बिके पड़े स्टाक को सरप्लस घोषित किया जाता है। इसके बाद सप्लायर कंपनी पर डेमरेज चार्ज लगाया जाता है। आरोप है कि जुर्माने से बचने के लिए कंपनियां और कुछ विभागीय कर्मचारी मिलकर ऐसा स्टॉक बाहर खपाने लगे। इससे कंपनियों का पुराना स्टॉक भी क्लियर हो जाता था और अवैध कमाई का रास्ता भी खुल जाता था।
शिकायतों के बाद बड़े स्तर पर फेरबदल
सिलतरा वेयरहाउस में गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद विभाग ने 30 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए हैं। रायपुर जिले में प्रभारी उपायुक्त आबकारी की जिम्मेदारी प्रवीण वर्मा को सौंपी गई है। जिला आबकारी अधिकारी राजेश कुमार शर्मा को राजनांदगांव भेजा गया है। इसके अलावा सक्ती, बालोद, बेमेतरा, धमतरी, कोरबा और बलरामपुर समेत कई जिलों में भी अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं।
फैक्ट फाइल
- 12 मई 2026 को जारी हुआ नष्टीकरण आदेश
- 7,509 बॉक्स में रखी 3,566 बोतलें नष्ट होनी थीं
- ब्रेकेज पर 0.25 प्रतिशत छूट का प्रावधान
- सेवन हिल्स, बडवाइजर और आईबी शराब का स्टाक जांच में
- 30 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले
जांच कराकर करेंगे दोषियों पर कार्रवाई
“जिस शराब को नष्ट करने का आदेश दिया गया था, उसका बाजार में बेचा जाना गंभीर मामला है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
— पी.एस. एल्मा, कमिश्नर, आबकारी विभाग