
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: राज्य में विधानसभा चुनाव होने में करीब तीन साल का समय बचा हुआ है लेकिन इससे पहले चाल-चलन और चरित्र की सियासी जंग शुरू हो गई है। नौ साल पहले वर्ष 2016 में भाजपा के तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री रहे राजेश मूणत के कथित अश्लील सीडी सामने आई थी, उस सीडी ने तब राजनीतिक भूचाल का रूप ले लिया था।
मामले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, विनोद वर्मा समेत अन्य की गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीतिक माहौल गर्म हो गया था। विनोद के बाद भूपेश जमानत पर छूटकर बाहर आए तो राज्य की राजनीतिक फिजा ही बदल चुकी थी। तत्कालीन भाजपा सरकार को उम्मीद थी कि 2018 विधानसभा चुनाव में जीत मिलेगी लेकिन इसके उलट कांग्रेस को भारी बहुमत से जीत मिली और भूपेश बघेल के नेतृत्तव में कांग्रेस की सरकार बनी।
सीडी कांड का जिन्न अब फिर से बाहर आ गया है। सीबीआई कोर्ट ने भूपेश बघेल को इस मामले में बरी करने के आदेश को रद्द कर उनकी मुश्किले बढ़ा दी है। उन पर पहले से ऑनलाइन महादेव एप के प्रमोटरों से करोड़ों रुपये लेने के आरोप है। अब सबकी निगाहे ताजा घटनाक्रम पर टिकी है।
इस कहानी की शुरूआत 27 अक्टूबर 2017 को पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल के बंगले से हुई थी। उन्होंने सुबह छह बजे एक प्रेस कांफ्रेंस की जिसमें मीडिया को एक सीडी बांटी थी। इस सीडी में एक आपत्तिजनक वीडियो था जिसे लेकर भूपेश ने दावा किया था कि महिला के साथ बेहद आपत्तिजनक स्थिति में दिखने वाला व्यक्ति मंत्री राजेश मूणत हैं।
देखते देखते यह वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। हालांकि इस सीडी के सामने आने के कुछ ही घंटों के अंदर मंत्री मूणत ने इसका खंडन करते हुए सीडी को फर्जी बताया और तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की। भाजपा ने इसे कांग्रेस का षड्यंत्र बताते हुए इसे गंदी राजनीति कहा था।
मंत्री की सीडी सार्वजनिक होने के बाद रायपुर से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हंगामा हुआ। इसके बाद पुलिस ने गाजियाबाद से वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया और यह दावा किया कि उनके निवास से इस वीडियो क्लिप की 500 सीडी और दो लाख रूपए जब्त किए गए हैं।
यह कार्रवाई प्रकाश बजाज नामक एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर की गई थी। उसी शाम रायपुर पुलिस की टीम गाजियाबाद पहुंची और वहां से विनोद वर्मा को गिरफ्तार कर लिया। मूलरूप से रायपुर के रहने वाले विनोद वर्मा तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल के साथ रहकर उनकी मीडिया सेल का काम देख रहे थे।
शिकायतकर्ता प्रकाश बजाज ने आरोप लगाते हुए पंडरी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराया कि विनोद वर्मा ने उन्हें लैंडलाइन नंबर से फोन कर कहा था कि तुम्हारे आका की एक सीडी मेरे पास है। पैसा नहीं दोगे तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो। प्रकाश बजाज की इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने विनोद वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था।
कथित अश्लील सीडी कांड विनोद वर्मा की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि अपने मंत्री को बचाने के लिए सरकार निर्दोष व्यक्ति को फंसाने की कोशिश कर रही है। मामले की तब एसआइटी जांच कर रही थी।
17 नवंबर 2017 को कांग्रेस की मांग पर निष्पक्ष जांच के लिए मामले की कमान एसआइटी ने सीबीआई को सौंपी। सीबीआइ ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि इसी सीडी को फोरेंसिक विश्लेषण के माध्यम से प्रमाणित किया गया है, इसे मुंबई की एक एडिटिंग लैब में एक लाख रूपए देकर तैयार कराई थी। इस पूरे मामले के मास्टर माइंड भाजपा नेता कैलाश मुरारका हैं, इस काम में एक अन्य आरोपी विजय पांड्या और रिंकू खानुजा ने उनकी मदद की।
पूरे मामले में अब जो तथ्य सामने आए हैं उनसे यह बात निकल कर आई थी कथित सीडी स्कैंडल में राजेश मूणत को बदनाम करने के लिए कथित तौर पर उनके तत्कालीन पार्टी सहयोगी कैलाश मुरारका ने पूरा व्यूह रचा था। एक अश्लील वीडियो क्लिप पर सुपरमिंप के जरिए मूणत के चेहरे को मर्ज किया गया। यह दावा सीबीआइ ने अपनी चार्जशीट में भी किया था।
सीबीआइ ने जांच शुरू की और इसके साथ ही कई और नाम सामने आने लगे। विनोद वर्मा के साथ ही मामले में विजय पंड्या, कैलाश मुरारका, विनोद भाटिया, रिंकु खनुजा और पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल को भी आरोपित बनाया गया। इस संबंध में प्रकाश बजाज और मंत्री राजेश मूणत ने उनकी छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया था।
छह जून 2018 को सीडी कांड एक नया मोड़ आया जब सीबीआइ की पूछताछ से दबाव में आकर आरोपित बनाए गए रिंकू खनूजा ने अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद एक बार फिर कांग्रेस ने तत्कालीन भाजपा सरकार को घेरे में लेते हुए आरोप लगाया था कि गलत तरीके से मामले में फंसाए जाने से आहत होकर रिंकू ने फांसी लगाई है।
जांच एजेंसी का दावा है कि मुरारका ने गाजियाबाद में पत्रकार विनोद वर्मा को उनके निवास पर जाकर यह क्लिप दी थी। इसके बाद विनोद आरोपित बनाया गया। इसके साथ यह भी आरोप लगाया गया कि वर्मा और मुरारका पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल से इस सीडी को लेकर उनके एक अन्य सहयोगी के साथ दिल्ली के एक होटल में मिले थे।
24 सितंबर 2018 में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और विनोद वर्मा को सीडी स्कैंडल में गिरफ्तार किया गया था। विनोद वर्मा पर लगाए गए ब्लैकमेलिंग के आरोप को प्रकाश बजाज कोर्ट में साबित नहीं कर पाए, लिहाजा उन्हें जमानत मिल गई। इस दौरान विधानसभा चुनाव सिर्फ तीन महीने बचे थे, लेकिन बघेल ने जमानत लेने से इनकार किया। इससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई और कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए।
“मैं भी भूपेश हूं” के नारे हर जगह गूंजने लगे। विरोध प्रदर्शनों ने भाजपा के खिलाफ माहौल तैयार किया। कुछ दिनों बाद बघेल जेल से रिहा हुए। इसके बाद कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल कर 68 सीटें जीतीं। सीडी कांड को छत्तीसगढ़ की राजनीति का टर्निंग पाइंट भी माना जाता है।