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रायपुर जेल की रोटी खानी है, तो देने पड़ेंगे इतने रुपये, केवल 30 लोगों को ही मिलेगा कैदियों का बनाया भोजन

अपनी स्वादिष्ट मुंगौड़ी और जलेबी के लिए मशहूर रायपुर केंद्रीय जेल की आस्था कैंटीन अब एक नई शुरुआत करने जा रही है। कैदियों के हाथों से तैयार 'जेल की रो...और पढ़ें

By Satish PandeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 09:59:54 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 10:02:05 AM (IST)
रायपुर जेल की रोटी खानी है, तो देने पड़ेंगे इतने रुपये, केवल 30 लोगों को ही मिलेगा कैदियों का बनाया भोजन
नई सेवा शुरू किए जाने की प्रतीकात्मक एआई तस्वीर।

HighLights

  1. कैदियों के हाथों तैयार होगी जेल की रोटी
  2. आस्था कैंटीन में मात्र 275 रुपए कीमत
  3. भोजन बिक्री से कैदियों का होगा पुनर्वास

सतीश पांडेय, नईदुनिया, रायपुर। अपनी लजीज मुंगौड़ी, समोसा और जलेबी के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध रायपुर केंद्रीय जेल की आस्था कैंटीन अब एक और अनूठी सौगात लेकर आई है। कैदियों द्वारा तैयार किए जाने वाले व्यंजनों की श्रृंखला में अब 'जेल की रोटी' को भी शामिल कर लिया गया है। जेल प्रशासन की इस नई पहल से अब आम नागरिक भी कैदियों के हाथ का बना शुद्ध और पारंपरिक भोजन का स्वाद ले सकेंगे।

जेल प्रशासन द्वारा शुरू किए जा रहे जेल की रोटी विशेष फूड पैकेट की कीमत 275 रुपए तय की गई है। व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी बनाए रखने के लिए शुरुआती चरण में प्रतिदिन केवल 30 फूड पैकेट ही बेचे जाएंगे। ग्राहकों को इसके लिए आस्था कैंटीन में पहले से बुकिंग करानी होगी और तय समय पर उन्हें पैकेट उपलब्ध कराया जाएगा। इस फूड पैकेट में ग्राहकों को रोटी, चावल, दाल, मौसमी सब्जी, पापड़, सलाद और अचार परोसा जाएगा।


पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की ओर कदम

रायपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक योगेश क्षत्री ने बताया कि पहल का उद्देश्य किसी प्रकार का व्यावसायिक लाभ कमाना नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य सजा काट रहे कैदियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है। फूड पैकेट की बिक्री से प्राप्त होने वाली पूरी आय कैदियों के कल्याण और उनके कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च की जाएगी।

जनता के बीच बढ़ता आकर्षण

पिछले दस वर्षों से अधिक समय से रायपुर केंद्रीय जेल की आस्था कैंटीन और कैफे सेंटर का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। यहां बनने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वाद के कारण रोजाना अच्छी-खासी भीड़ जुटती है। अब 'जेल की रोटी' की इस नई शुरुआत से शहरवासियों में एक अलग ही उत्सुकता देखने को मिल रही है, जिससे कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में और अधिक मदद मिलेगी।