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छत्तीसगढ़ के जंगल में हवा में उड़ती दिखी विशालकाय गिलहरी, पहली झलक ने किया हैरान; उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा अद्भुत नजारा

रायपुर के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ भारतीय विशाल उड़न गिलहरी की मौजूदगी दर्ज की गई है।

By Ramkrishna DongreEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Mon, 22 Jun 2026 07:21:28 PM (IST)Updated Date: Mon, 22 Jun 2026 07:21:28 PM (IST)
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छत्तीसगढ़ के जंगल में हवा में उड़ती दिखी विशालकाय गिलहरी, पहली झलक ने किया हैरान; उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में  दिखा अद्भुत नजारा
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखी दुर्लभ उड़न गिलहरी, कैमरे में हुई कैद

HighLights

  1. यह जीव रात में अधिक सक्रिय रहता है
  2. त्वचा की झिल्ली से करती है ग्लाइडिंग
  3. जंगल की समृद्ध जैव विविधता का संकेत

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक दुर्लभ वन्यजीव भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल) की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस दुर्लभ प्रजाति का फोटो भी कैमरे में कैद हुआ है।

भारतीय विशाल उड़न गिलहरी अपनी खास ग्लाइडिंग क्षमता और निशाचर जीवनशैली के लिए जानी जाती है। यह सामान्य गिलहरियों से अलग होती है और पेड़ों के बीच मौजूद विशेष त्वचा की झिल्ली की मदद से लंबी दूरी तक हवा में फिसलन जैसी उड़ान भरती है।

घने जंगलों में रहने वाली दुर्लभ प्रजाति

विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय विशाल उड़न गिलहरी आमतौर पर घने और सुरक्षित वनों में रहना पसंद करती है। यह जीव दिन के समय पेड़ों के खोखलों या घने पत्तों के बीच छिपकर आराम करता है। रात होते ही यह सक्रिय होती है और भोजन की तलाश में पेड़ों के बीच घूमती है। इसी कारण इसका दिखाई देना बेहद दुर्लभ माना जाता है।


पक्षियों की तरह नहीं उड़ती, करती है ग्लाइड

इस उड़न गिलहरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी उड़ान क्षमता है। यह पक्षियों की तरह उड़ नहीं सकती, लेकिन इसके आगे और पीछे के पैरों के बीच मौजूद विशेष त्वचा की झिल्ली इसे एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी दूरी तक ग्लाइड करने में मदद करती है। यह क्षमता इसे जंगल में आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में सक्षम बनाती है।

वन पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती का संकेत

जानकारों का कहना है कि भारतीय विशाल उड़न गिलहरी का मिलना उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के स्वस्थ और सुरक्षित वन क्षेत्र का संकेत है। यह प्रजाति केवल पुराने, घने और प्राकृतिक रूप से समृद्ध जंगलों में ही पाई जाती है। ऐसे में इसकी मौजूदगी क्षेत्र की जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इंडियन फ्लाइंग स्क्विरल का दिखाई देना हमारे लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण और सुखद क्षण है। यह हमारे जंगलों की उत्कृष्ट गुणवत्ता और संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। वन मंत्री केदार कश्यप और उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में हम वन्यजीवों के संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

- वरूण जैन, उप संचालक, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व