
नईदुनिया प्रतिनिधि, खैरागढ़। दल्लीखोली वन क्षेत्र में हुई वन्यजीवों की असामयिक मौत से वन महकमा में हड़कंप मच गया है। भीषण गर्मी के बीच सामने आई इस घटना में मोर, उल्लू, कबरबिज्जू सहित 15 पक्षी और वन्यप्राणी मृत पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में हीट स्ट्रोक की आशंका जताई गई है, लेकिन पानी में जहर मिलाने की आशंका को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। वन विभाग ने परीक्षण के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया है।
प्रारंभिक निरीक्षण में विशेषज्ञों ने जहरखुरानी की आशंका को कम बताते हुए हीट स्ट्रोक को संभावित कारण माना है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष फारेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मृत जीवों में तीन मोर, एक भृंगराज, दो कौआ, एक ओरिएंटल मैगपाई राबिन, एक रूफस ट्रीपाई, दो जंगली उल्लू और पांच कबरबिज्जू शामिल हैं। सभी शवों का दाह संस्कार वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।

बताया गया कि सोमवार की शाम लगभग छह बजे प्रतीक ठाकुर ने वन विभाग को दूरभाष पर सूचना दी कि दल्लीखोली वन क्षेत्र के पास कुछ वन्यजीव मृत अवस्था में पड़े हैं। सूचना मिलते ही खैरागढ़ वन परिक्षेत्र का अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि क्षेत्र में मोर, उल्लू, कबरबिज्जू सहित कई पक्षी और वन्यजीव मृत अवस्था में पड़े हुए थे।
वन अमले ने तुरंत शवों को सुरक्षित रूप से संरक्षित कराया। साथ ही पास में स्थित जल स्रोत (झिरिया) पर पहरेदार तैनात कर लगातार निगरानी शुरू की गई, ताकि जांच पूरी होने तक कोई अन्य जीव उस जल का उपयोग न कर सके।
मंगलवार को सुबह पुनः वन अमला और अधिकारियों द्वारा पूरे क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया गया, जिसमें आसपास कोई अन्य मृत वन्यजीव या संदिग्ध गतिविधि नहीं पाई गई। मुख्य वन संरक्षक एम. मर्सीबेला, वनमंडलाधिकारी पंकज राजपूत व अन्य ने जंगल पहुंचकर जानकारी ली।
कानन पेंडारी जू से आए वन्यजीव विशेषज्ञों ने भी स्थल का निरीक्षण किया। मृत वन्यजीवों का पोस्टमार्टम बिलासपुर से आई डॉक्टर टीम एवं स्थानीय पशु शल्यज्ञ डा. विनय मिश्रा द्वारा किया गया। जांच के लिए विसरा और झिरिया जल के नमूने को फारेंसिक लैब भेजा गया है।
जांच की जा रही है "भीषण गर्मी और पानी में जहर को ध्यान में रखते हुए गहन जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। जल स्रोत तथा पर्यावरणीय परिस्थितियों की भी विस्तृत वैज्ञानिक जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।" — पंकज राजपूत, वन मंडलाधिकारी, केसीजी