
रोहित देवांगन, नईदुनिया, राजनांदगांव। पितृ दिवस पर पिता के प्रेम, त्याग और समर्पण की मिसाल पेश करने वाली एक मार्मिक कहानी सामने आई है। जब 38 वर्षीय ममता साहू की दोनों किडनियां खराब होने के कारण उन्हें नियमित डायलिसिस के सहारे जीवन बिताना पड़ रहा था, तब उनकी पीड़ा देखकर 71 वर्षीय पिता सीएल साहू का हृदय पसीज गया। उम्र के इस पड़ाव में भी उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी बेटी को जीवन का सबसे अनमोल उपहार देने का निर्णय किया।
वर्ष 2023 में आवश्यक जांच और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के बाद पिता सीएल साहू ने अपनी एक किडनी बेटी ममता को दान कर दी। सफल प्रत्यारोपण के बाद ममता को नया जीवन मिला। बता दें कि उस दौरान पिता की उम्र 68 वर्ष और बेटी की उम्र 35 वर्ष थी। आज तीन साल बाद पिता और बेटी दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं।
ममता बताती हैं कि डायलिसिस के दिनों में हर दिन उनके लिए किसी संघर्ष से कम नहीं था। परिवार के सामने चिंता और अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे थे, लेकिन पिता ने कभी हिम्मत नहीं हारने दी।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्टाफ नर्स
ममता साहू पेशे से मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण की मिसाल पेश कर रही हैं। वर्ष 2023 में किडनी प्रत्यारोपण के बाद नया जीवन मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी सेवा भावना में कोई कमी नहीं आने दी। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखभाल को भी अपना धर्म मानती हैं।
ममता हर मरीज के प्रति संवेदनशील व्यवहार और समर्पण के साथ काम करती हैं। कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद भी उन्होंने कभी अपने कर्तव्यों से मुंह नहीं मोड़ा। उनकी कार्यशैली और सकारात्मक सोच मरीजों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। परिवार और पेशे दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए ममता साहू आज समाज के लिए सेवा, समर्पण और साहस की मिसाल बनकर सामने आई हैं।
71 की उम्र में भी फिटनेस का जुनून, सुबह 4:30 बजे से होती है दिनचर्या की शुरुआत
71 वर्ष की उम्र में भी सीएल साहू अनुशासित दिनचर्या और बेहतर स्वास्थ्य के कारण युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। अपनी बेटी ममता साहू को किडनी दान कर नया जीवन देने वाले सीएल साहू आज भी पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय हैं।
दैनिक शेड्यूल वर्षों से तय
उनका दैनिक शेड्यूल वर्षों से तय है। वे प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे उठते हैं और नित्यक्रिया से निवृत्त होने के बाद नियमित रूप से चार से पांच किलोमीटर तक पैदल भ्रमण करते हैं। संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम को वे अच्छे स्वास्थ्य का सबसे बड़ा मंत्र मानते हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी उनकी ऊर्जा और सक्रियता देखने लायक है।