
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। धर्मापुर में अवैध मिशनरी आश्रम चलाने के मामले में आरोपित डेविड चाको की गिरफ्तारी को लेकर उठ रहे सवालों पर पुलिस ने विराम लगा दिया है। शनिवार को सुकुल दैहान पुलिस चौकी ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
छह जनवरी को मुख्यालय से आठ किमी दूर स्थित ग्राम धर्मापुर में डेविड के मिशनरी हेडक्वार्टर का राजफाश हुआ था। यहां कोंडागांव के नाबालिग बच्चों को अवैध तरीके से रखे जाने की पुष्टि हुई थी।
आठ जनवरी को सुकुल दैहान पुलिस चौकी में चाको के खिलाफ हिंदू जागरण मंच के सुशील लड्ढा की शिकायत पर छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3, 4, 5 एवं बीएनएस की धारा 299 के तहत एफआइआर दर्ज की थी।
लगभग ढाई महीने की जांच के बाद पुलिस ने डेविड चाको को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिसिया जांच के दौरान डेविड चाको की भूमिका मतांतरण के मिशनरी कमांडर के तौर पर सामने आई जो कि इंडिया पेंटाकोस्टल चर्च (आइपीसी) केरला से जुड़ा हुआ है।
वह वर्ष 1996 में छत्तीसगढ़ आया और विभिन्न जिलों में रहा। केरला निवासी डेविड चाको वर्ष 2006 में आइपीसी से पास्टर के तौर पर जुड़ा और इसके बाद उसने राज्य के सरगुजा, बस्तर इलाके में अपना नेटवर्क फैलाना शुरू किया। इसी दौरान उसने राजनांदगांव को अपना ठिकाना बनाया था।
चाको हर साल छह महीने अमेरिका में गुजारता था। उसके विदेश कनेक्शन ने भी इस पूरे मामले को और हाईप्रोफाइल बना दिया। इस पूरे प्रकरण में पुलिस अब तक तीन दर्जन से अधिक लोगों को चिन्हांकित कर चुकी है जिनमें से कईयों से बारी-बारी अलग-अलग पूछताछ की गई है। इनमें स्थानीय संस्थाओं से जुड़े लोगों के अलावा प्रदेश-देश के लोग भी शामिल हैं। इस दौरान चाको से भी लगातार पूछताछ जारी रही।
मतांतरण के इस प्रकरण में आइपीएस वैशाली जैन के साथ दो अन्य पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम जांच में जुटी हुई थी। छानबीन के दौरान आरोपित के कब्जे से कई महंगे डिजिटल गैजेट्स बरामद किए गए थे। जिसमें एक सोलर ऊर्जा से चलने वाला अमेरिका से लाया गया प्रोजेक्टर भी शामिल था।
यह इस मामले में एक अहम कड़ी साबित हुआ। जांच में सामने आया कि इसका इस्तेमाल सरगुजा, बस्तर के दुर्गम इलाकों में आदिवासियों को ईसाई धर्म की जानकारी दिए जाने के लिए किया जाता था। कई तरह की संदिग्ध वीडियो सामग्री भी पुलिस ने बरामद की थी।
चाको के कब्जे से कई संदिग्ध प्रशिक्षण सामग्री, किताबें और ट्रेवल वाउचर्स भी जब्त किए गए थे। इसी जांच के दौरान कोड नेम 'पाल' उजागर हुआ था। यह पाल एक तरह से मिशनरी के लिए स्लीपर सेल का काम करते थे जो गांव में विधवाओं, अकेले रहने वाले लोगों, अनाथ बच्चों, गरीब परिवार और बीमार लोगों की जानकारी जुटाते थे।
इसमें कई मतांतरित लोगों को भी शामिल किया गया था। इन्हें बकायदा रायपुर जैसे स्थानों में होटल में प्रशिक्षण भी दिया जाता था। इनके रुकने, आने-जाने की व्यवस्था के लिए ट्रेवल वाउचर्स का इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने बताया कि आरोपित चाको से अमेरिका में अध्यापन के बाद भारत लौटने पर प्राप्त कथित धनराशि को लेकर भी पूछताछ की गई है।
जांच का फोकस इस बात पर है कि यह राशि किस माध्यम से भारत लाई गई, किस खाते से किस खाते में स्थानांतरित हुई और डॉलर को किस प्रक्रिया से अन्य स्वरूप में बदला गया। इसके साथ ही चर्च के हेडक्वार्टर, संचालन प्रक्रिया, प्रशिक्षण स्थलों, आयोजकों और वित्तीय प्रबंधन की भी गहन पड़ताल अब भी की जा रही है।