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बस्तर में बंदूक की गूंज थमी तो लौट आई इस गांव के 10 लोगों के आंखों की रोशनी

जिस इलाके में कभी बंदूक की आवाजें लोगों के जीवन पर भारी पड़ती थीं, वहां अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद जगा रही है।

By Ramkrishna DongreEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 01 Jun 2026 07:01:20 PM (IST)Updated Date: Mon, 01 Jun 2026 07:01:20 PM (IST)
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बस्तर में बंदूक की गूंज थमी तो लौट आई इस गांव के 10 लोगों के आंखों की रोशनी
मोतियाबिंद के सफल ऑपरेशन के बाद बुजुर्ग

HighLights

  1. माओवादी हिंसा के डर से उबरकर सुशासन की ओर बढ़ा सुकमा
  2. डॉक्टरों की टीम ने गोगुण्डा के 10 मरीजों को दी नई दृष्टि
  3. स्वास्थ्य विभाग ने दुर्गम इलाकों में सर्वे कर ढूंढ निकाले मरीज

नईदुनिया प्रतिनिधि, सुकमा। कभी माओवादी हिंसा और भय के साये में जीने वाला सुकमा जिले का दूरस्थ गोगुण्डा गांव आज बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिस इलाके में कभी बंदूक की आवाजें लोगों के जीवन पर भारी पड़ती थीं, वहां अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद जगा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और जिला प्रशासन की सक्रिय पहल से गोगुण्डा के 10 मोतियाबिंद मरीजों की सफल शल्य चिकित्सा कर उन्हें नई दृष्टि प्रदान की गई है।

दुर्गम गांव तक पहुंची स्वास्थ्य टीम

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल के तहत स्वास्थ्य कर्मियों ने गोगुण्डा जैसे दूरस्थ गांवों में घर-घर पहुंचकर सर्वे किया। इस दौरान मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों की पहचान की गई। ग्रामीणों को विशेष वाहनों से जिला चिकित्सालय सुकमा लाया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका निःशुल्क उपचार किया गया।


विशेषज्ञों की देखरेख में सफल उपचार

सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप तथा नेत्र शल्य चिकित्सक डॉ. खुशबू देवांगन के नेतृत्व में सभी 10 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया गया। उपचार के बाद मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया और स्वास्थ्य में सुधार होने पर सुरक्षित रूप से उनके गांव वापस पहुंचाया गया। ग्रामीणों ने वर्षों बाद स्पष्ट रूप से दुनिया देखने का सुखद अनुभव प्राप्त किया।

इलाज के साथ मिला सम्मान और अपनापन

इस अभियान की विशेषता केवल चिकित्सा सुविधा नहीं रही, बल्कि मरीजों के सम्मान और आत्मीय देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अस्पताल से छुट्टी के समय मरीजों को फल वितरित किए गए और उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस मानवीय पहल ने ग्रामीणों के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है।

स्वास्थ्य विभाग ने उपचार प्राप्त कर चुके मरीजों और उनके परिजनों से अपील की है कि वे अपने आसपास के अन्य मोतियाबिंद पीड़ित लोगों को भी अस्पताल लाने के लिए प्रेरित करें। इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है और गांवों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। प्रशासन की यह पहल अब जनभागीदारी वाले अभियान का रूप लेती नजर आ रही है।

बदलते सुकमा की प्रेरक तस्वीर

माओवादी गतिविधियों में आई कमी के बाद शासन की योजनाएं अब निर्बाध रूप से दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार ने ग्रामीणों को बड़ी राहत दी है। अब उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों की ओर भटकना नहीं पड़ता।

गोगुण्डा के 10 ग्रामीणों को मिली नई रोशनी केवल एक चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि सुकमा में सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और विकास की नई सुबह का प्रतीक है। यह पहल साबित करती है कि जब शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तब बदलाव केवल दिखाई नहीं देता, बल्कि लोगों के जीवन को रोशन भी कर देता है।

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