
कपिल नीले, नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव ने इंजीनियरिंग शिक्षा की दिशा बदल दी है। अब छात्र सिर्फ ट्रेंड देखकर नहीं ब्रांच का चयन करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है। बल्कि उन्हें अपने भविष्य की स्थिरता और स्किल्स बढ़ने पर जोर दे रहे है।
मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम के लिए अभी काउंसिलिंग शुरू नहीं हुई है, लेकिन उसके पहले ही छात्रों की पसंद में बड़ा बदलाव नजर आ रहा है। कुछ साल पहले तक जहां कम्प्यूटर साइंस (सीए) और आइटी ब्रांच की डिमांड सबसे ज्यादा रहती थी, लेकिन सर्विस सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का प्रभाव बढ़ने लगा है। यहां तक कि साफ्टवेयर इंडस्ट्री में इन दिनों भूचाल आया हुआ है।
इसकी वजह से बड़ी संख्या में विद्यार्थी फिर एक बार पारंपरिक इंजीनियरिंग की ब्रांच रूचि दिखा रहे है। ज्यादातर छात्र-छात्राएं सिविल और मैकेनिकल में अपना कैरियर देखने लगे है। यहां तक कि इलेक्ट्रोनिक से जुड़ी विभिन्न ब्रांच की डिमांड बढ़ने लगी है।
पिछले कुछ वर्षों में एआइ तकनीक ने तेजी से विकास किया है। आज ऐसे कई एआइ टूल्स मौजूद हैं जो कोडिंग, डेटा एनालिसिस और साफ्टवेयर डेवलपमेंट के कई काम आसान बना रहे हैं। इससे छात्रों को यह लगने लगा है कि भविष्य में कम्प्यूटर साइंस और आईटी क्षेत्र में नौकरियां कम हो सकती हैं या प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी।
विशेषज्ञ के मुताबिक कि यह पूरी तरह सही धारणा नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि अब केवल बेसिक कोडिंग स्किल्स से काम नहीं चलेगा। यही कारण है कि छात्र ऐसे क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं जहां तकनीकी कौशल के साथ फील्ड वर्क और प्रैक्टिकल अनुभव ज्यादा जरूरी है, जिसमें इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रोनिक्स, सिविल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में रूझान बढ़ेंगा।
कैरियर काउंसलरों के पास इन दिनों छात्रों और अभिभावकों की संख्या बढ़ गई है। सभी यह जानना चाहते हैं कि कौन-सी ब्रांच भविष्य के लिए ज्यादा सुरक्षित और बेहतर रहेगी। निजी कालेज के ग्रुप डायरेक्टर प्लेसमेंट डा. अतुल भरत का कहना है कि एआइ के कारण छात्रों में एक तरह की असमंजस की स्थिति है। वे सोच रहे हैं कि कोडिंग खत्म हो जाएगी। जबकि ऐसा नहीं है। कंपनियों में कोडिंग-डाटा एनालिसिस और साफ्टेवयर डेवलपमेंट व टेस्टिंग से जुड़ा काम एआइ टूल्स करेंगे।
वे कहते है कि मशीन लर्निंग पर ध्यान देने की जरूरत है। अब इंडस्ट्री को हाई-लेवल स्किल्स चाहिए। इसी वजह से पारंपरिक ब्रांचों कुछ साल पहले नही अपग्रेड हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल और सोलर ने ट्रेड बदल दिया है। ईलेक्ट्रिक व्हीकल का चलन बढ़ने से आटोमोबाइल सेक्टर में बूम आया है। इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रानिक्स, मेकाट्रानिक्स, और मेट्रोनिक्स इंजीनियरिंग की ऐसी शाखाएं हैं जो रोबोटिक्स, आटोमेशन और स्मार्ट मशीनों के भविष्य को आकार दे रही हैं। ये शाखाएं मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक, कंप्यूटर और कंट्रोल सिस्टम को मिलाकर जटिल सिस्टम बनाती हैं।
डीएवीवी की प्लेसमेंट सेल प्रभारी डा. गोविंद माहेश्वरी का कहना है कि कोडिंग-साफ्टवेयर डेवलपमेंट से जुड़ी नौकरियां भले ही कम होगी। आईटी सेक्टर में अब कंपनियां में एआइ और मशीन लनिंग जरूरी हो चुकी है। कंपनियों में कुशल उम्मीदवारों को ही चुन रही हैं। दूसरी ओर इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन, आटोमोबाइल, इलेक्ट्रोनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगातार ग्रोथ हो रही है। इससे सिविल और मैकेनिकल इंजीनियरों की मांग बढ़ रही है।
शिक्षाविद् डा. संजीव टोकेकर का कहना है कि बदलते समय के साथ इंजीनियरिंग संस्थानों को सीएस-आइटी पाठ्यक्रम में बदलाव करना होगा। डीएवीवी ने एआइ को अधिकांश पाठ्यक्रमों से जोड़ दिया है। वे कहते है कि इंजीनियरिंग ब्रांच में एआई, आटोमेशन और नई तकनीकों को शामिल करना होगा।