
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विद्यार्थियों की शिकायतों का निवारण विनियम 2023 को अब सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में लोकपाल की भूमिका सिर्फ औपचारिक नहीं होगी।
लोकपाल के आदेश मानना संस्थानों के लिए अनिवार्य होगा और यदि कोई शिकायत झूठी या बेबुनियाद पाई गई तो उस पर शिकायत करने वाले छात्र के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। यह आदेश सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों और निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के दायरे में आने वाले संस्थानों पर लागू होगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की शिकायतों का समय पर, पारदर्शी और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करना है।
यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई शिकायत झूठी पाई जाती है तो लोकपाल शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से कहा है कि वे छात्र शिकायत निवारण नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि हर कॉलेज और विश्वविद्यालय अपनी वेबसाइट और प्रास्पेक्टस में अहम जानकारी साफ-साफ दिखाएं, जिसमें शिकायत निवारण समिति के सदस्यों के नाम, पद और संपर्क विवरण, लोकपाल का नाम, पता, ई-मेल और कार्यकाल, शिकायत और अपील दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया शामिल हो।
यूजीसी ने निर्देशित किया है कि हर विश्वविद्यालय में लोकपाल की नियुक्ति जरूरी है। अधिकतर संस्थानों में लोकपाल तो नियुक्त कर दिए गए हैं, लेकिन नियमों के मुताबिक काम नहीं हो रहा। इसी वजह से अब स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी अपनी शिकायत को लेकर भटकें नहीं। लोकपाल छात्रों के लिए एक स्वतंत्र अपीलीय प्राधिकरण होगा। वह उन्हीं मामलों को सुनेगा, जिनमें छात्र पहले छात्र शिकायत निवारण समिति की प्रक्रिया पूरी कर चुका है।
गलत जानकारी दी तो छात्र कर सकेगा शिकायत प्रास्पेक्टस में गलत या भ्रामक जानकारी देने पर दी और विद्यार्थी छात्र को नुकसान हुआ तो इसकी शिकायत समिति या लोकपाल से कर सकता है। हर कालेज और विश्वविद्यालय में छात्र शिकायत निवारण समिति बनाना अनिवार्य होगा। इसमें एक प्रोफेसर अध्यक्ष, चार वरिष्ठ शिक्षक, एक छात्र प्रतिनिधि और कम से कम एक महिला और एक विशेष वर्ग का सदस्य को शामिल रहेंगे।
समिति से संतुष्ट नहीं तो लोकपाल के पास अपील अगर विद्यार्थी समिति के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वह 15 दिन के भीतर लोकपाल के पास अपील कर सकता है। लोकपाल 30 दिनों के अंदर शिकायत का निपटारा करने का प्रयास करेगा। खास बात यह है कि लोकपाल के आदेश सिर्फ सुझाव नहीं होंगे, बल्कि उनका पालन करना कालेज और विश्वविद्यालय के लिए अनिवार्य होगा।