
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। अब इसका असर करियर पर भी दिखाई देने लगा है। शहर की आईटी, मैनेजमेंट, मार्केटिंग, डेटा एनालिटिक्स और कई अन्य कंपनियां अब ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिन्होंने अपनी डिग्री के साथ एआई से जुड़े सर्टिफिकेट कोर्स भी किए हों। कालेजों में पढ़ने वाले छात्र और नौकरी कर रहे युवा भी तेजी से एआई वर्कशाप, आनलाइन कोर्स और माइक्रो-सर्टिफिकेशन की ओर बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पहले कंपनियां केवल डिग्री और अनुभव देखती थीं, लेकिन अब उम्मीदवार में एआई की कितनी समझ है, इसे भी आंका जा रहा है। कई कंपनियां इंटरव्यू के दौरान यह परखती है कि उम्मीदवार एआई टूल्स का उपयोग किस तरह करता है और उसके पास संबंधित सर्टिफिकेट हैं या नहीं।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि डिग्री की उपयोगिता खत्म नहीं हुई है, लेकिन केवल अब डिग्री पर्याप्त नहीं मानी जा रही। कंपनियां यह भी देख रही हैं कि कैंडिडेट नई तकनीक के साथ कितना अपडेट है। आने वाले समय में भी डिग्री, प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप और एआई सर्टिफिकेट का संयुक्त महत्व होगा।
एआई का प्रभाव केवल साफ्टवेयर कंपनियों तक सीमित नहीं है। इंदौर की कई मार्केटिंग एजेंसियां, ई-कामर्स कंपनियां, बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़ी फर्म और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियां भी एआई स्किल वाले युवाओं की तलाश कर रही हैं। विशेषज्ञ हर्ष माहेश्वरी के अनुसार, अब मार्केटिंग टीमों में एआई आधारित कंटेंट तैयार करने, डाटा एनालिसिस करने और कस्टमर बिहेवियर समझने के लिए एआई टूल्स का उपयोग किया जा रहा है। इसी तरह मैनेजमेंट सेक्टर में रिपोर्टिंग, प्रेजेंटेशन और बिजनेस एनालिसिस के लिए एआइ का उपयोग किया जा रहा है।
जाब कंस्लटिंग फर्म से जुड़े तनवीर टुटेजा के अनुसार, एआई सर्टिफिकेट का असर पैकेज पर दिख रहा है। एक जैसी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन वाले दो कैंडिडेट में से यदि एक के पास एआई सर्टिफिकेट और वर्क एक्सपिरिएंस है, तो उसे बेहतर अवसर मिलने की संभावना अधिक रहती है। कई कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को शुरुआती स्तर पर भी अधिक पैकेज देती है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा आनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से एआई, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और प्राम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे कोर्स कर रहे हैं। कुछ छात्र कालेज के दौरान ही इन कोर्स को पूरा कर रहे हैं ताकि पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें नौकरी मिलने में आसानी हो।
एआई के बढ़ते प्रभाव के कारण स्टार्टअप और इंडस्ट्री ग्रुप हर माह एआई वर्कशाप आयोजित कर रहे हैं। आइटी एक्सपर्ट शशांक चव्हाण के अनुसार, इसमें चैटजीपीटी, प्रांप्ट इंजीनियरिंग, मशीन लर्निंग, डाटा एनालिटिक्स, एआई आटोमेशन और एआई आधारित कंटेंट क्रिएशन जैसे विषय शामिल हैं। उन्होने बताया कि पहले जहां छात्र केवल प्रोग्रामिंग या डाटा साइंस सीखने पर ध्यान देते थे, वहीं अब एआई से जुड़े शार्टटर्म सर्टिफिकेट कोर्स की मांग तेजी से बढ़ी है।
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