
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। नीट (NEET-UG) परीक्षा को लेकर हालिया विवादों और री-एग्जाम की खबरों के बीच, देश के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के मन में इस परीक्षा को लेकर कई सवाल हैं। देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों (जैसे AIIMS, JIPMER आदि) में MBBS, BDS, BAMS और BHMS जैसे कोर्सेज में दाखिले के लिए नीट इकलौता जरिया है।
अगर आप भी इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं या इसके नियमों को विस्तार से समझना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं कि आखिर नीट परीक्षा का पूरा पैटर्न और मार्किंग स्कीम क्या है।
ऑफलाइन परीक्षा: नीट की परीक्षा पूरी तरह से पेन और पेपर मोड (Offline) में होती है, जहां छात्रों को ओएमआर (OMR) शीट पर सही गोलों को भरना होता है।
समय सीमा: इस परीक्षा को हल करने के लिए छात्रों को कुल 3 घंटे और 20 मिनट (यानी कुल 200 मिनट) का समय मिलता है।
भले ही छात्रों को 180 सवालों के ही जवाब देने होते हैं, लेकिन प्रश्नपत्र में कुल 200 सवाल पूछे जाते हैं। परीक्षा में चार विषय होते हैं: फिजिक्स (Physics), केमिस्ट्री (Chemistry), बॉटनी (Botany) और जूलॉजी (Zoology)।
हर विषय को दो सेक्शन (Section A और Section B) में बांटा जाता है...
हर विषय से 35 (Section A) + 10 (Section B) = 45 सवाल करने होते हैं।
कुल 4 विषय * 45 सवाल = 180 सवाल।
नीट परीक्षा की मार्किंग स्कीम बेहद कड़क होती है, जहां एक-एक नंबर पर हजारों रैंक का अंतर आ जाता है।
180 सवाल * 4 अंक = 720 कुल मार्क्स
चूंकि प्रतियोगिता बहुत कठिन है, इसलिए कई बार दो या दो से अधिक छात्रों के कुल अंक (जैसे 720 में से 700) बराबर आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में रैंक तय करने के लिए खास नियम अपनाए जाते हैं:
नीट परीक्षा में सफलता पाने के लिए केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि सटीक टाइम मैनेजमेंट और एक्यूरेसी (सटीकता) की जरूरत होती है। गलत उत्तरों पर कटने वाले नंबरों (Negative Marking) से बचने के लिए छात्रों को केवल उन्हीं 180 सवालों को चुनना होता है, जिन पर उन्हें पूरा भरोसा हो।
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