
नईदुनिया मनोरंजन डेस्क। अभिनेता संजय दत्त हर तरह के रोल को निभाने की प्रतिभा रखते हैं। उन्होंने नायक, खलनायक हर तरह के रोल निभाए हैं। लेकिन फिल्म आखिरी सवाल की शूटिंग उनके लिए आसन नहीं रही।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आसपास घूमती और उनसे जुड़े कई प्रश्नों के उत्तर बेबाकी से देती इस फिल्म का शुक्रवार को मुंबई में ट्रेलर किया गया। इस मौके पर संजय दत्त, अमित साध, नीतू चंद्रा, नोमाशी चक्रवर्ती समेत कई लोग मौजूद रहे।
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पूरी पटकथा और संवादों को बेहतरीन तरीके से लिखा गया है। एक कुर्सी पर बैठकर डायलाग बोलना और भावों को व्यक्त करना मेरे लिए नया था। मुझे इसे करने में मजा भी आया, क्योंकि यह करना कलाकार के लिए चुनौतीपूर्ण भी हो जाता है। यह फिल्म पूरे हिंदुस्तान को देखनी चाहिए। आखिरी सवाल फिल्म 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
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हिंदी सिनेमा में बदलाव का दौर हमेशा चलता रहता है और किसी एक जानर का दबदबा हमेशा कायम नहीं रहता। यह मानना है कि कामेडी फिल्म ‘पति पत्नी और वो-2’ के निर्देशक मुदस्सर अजीज का। वह कहते हैं कि अलग-अलग दौर होते हैं, हिंदी सिनेमा ने ऐसे दौर कई बार देखे हैं।
कई बार लगता है कि सिर्फ एक्शन चलेगा मारधाड़ वाली फिल्में चलेगी, फिर अचानक पिछले दशक के आठवें दशक के अंत में तीन खान आए और उन्होंने एक घूंसा भी नहीं मारा, फिर लोगों को लगा कि सिर्फ प्रेम कहानियां की चलेंगी।
जब चीची (गोविंदा) सर की तूती (कामेडी में) बोल रही थी, तब लोगों को लगा सिर्फ़ कामेडी चलेगी। सिनेमा समाज की तरह होता है, जैसे समाज़ में अलग-अलग लोगों के विचार बदलते रहते हैं, वैसे ही सिनेमा में भी होता है। मुझे नहीं लगता है कि कोई भी जानर थिएटर में दर्शक के लिए बंद या खत्म हो जाएगा।
मुझे लगता है कि हिंदुस्तान की जनता सिनेमा से प्यार करती है और करती रहेगी। हर तरह की फिल्में चलेंगी, बशर्ते वह अच्छी हों। मुझे इस बात से कोई घबराहट महसूस नहीं होती है कि अब केवल बड़ी फिल्में बनेंगी और चलेंगी। मैंने कई बड़ी फिल्मों को फ्लाप होते हुए इसी दौर में देखा है और कई छोटी फिल्मों को हिट होते हुए देखा है, जैसे सैयारा फिल्म है।
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