
लाइफस्टाइल डेस्क। इतिहास के पन्नों में कुछ ऐसी कलाकृतियां दर्ज हैं, जो कला और उपयोगिता के अद्भुत संतुलन को दर्शाती हैं। ऐसा ही एक नायाब नमूना है 1570 ईस्वी में इटली में निर्मित एक 'नाइफ केस' (चाकू रखने का डिब्बा)। इटली के रेनिसांस काल की यह कृति आज भी अपने बारीक शिल्प और कल्पनाशीलता के कारण दुनिया को हैरान कर देती है।
16वीं शताब्दी का इटली अपनी कलात्मक दृष्टि के लिए प्रसिद्ध था। उस दौर में रोजमर्रा के उपकरणों को भी भव्यता प्रदान की जाती थी। यह नाइफ केस पूरी तरह से एक ट्राउट मछली के आकार में बना है। इसकी संरचना इतनी सजीव है कि इसे पहली बार देखने पर यह किसी औजार के बजाय एक सजावटी वस्तु प्रतीत होती है। इसे बनाने में चमड़े, हड्डी और लोहे का कुशलतापूर्वक उपयोग किया गया है, जबकि इसकी भव्यता बढ़ाने के लिए कुछ हिस्सों पर सोने की परत भी चढ़ाई गई है।
मछली के इस सुंदर खोल के भीतर छह छोटे चाकू सजे हुए हैं। ये चाकू इतने सटीक और उपयोगी थे कि इनका उपयोग भोजन करने, शिकार करने या यात्रा के दौरान दैनिक कार्यों के लिए किया जाता था। इतिहासकार बताते हैं कि ऐसे कलात्मक और बहुमूल्य सेट उस समय केवल राजघरानों या कुलीन परिवारों की ही शोभा बढ़ाते थे।
ट्राउट मछली का चुनाव केवल दिखावे के लिए नहीं था। रेनिसांस काल में मछली को समृद्धि और प्रकृति का प्रतीक माना जाता था। ट्राउट की फुर्ती और सौंदर्य को बारीकी से उकेरना उस समय के धातु-शिल्पकारों की विशेषज्ञता का प्रदर्शन था।
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यूरोप की सांस्कृतिक और शिल्प परंपरा की यह अनमोल कड़ी आज इटली में नहीं, बल्कि जर्मनी के म्यूनिख स्थित बायेरिशेस नेशनल म्यूजियम (Bayerisches National Museum) में सुरक्षित है। यह केस आज भी 16वीं सदी के उन गुमनाम कारीगरों की कहानी सुनाता है, जिन्होंने लोहे और चमड़े जैसी कठोर वस्तुओं को जीवंत कला में बदल दिया।