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फर्जी जाति प्रमाण पत्र बन सकता है भविष्य पर संकट, कानूनन अपराध, उपयोग पर सजा का प्रावधान

पात्रता रखने वाले अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नागरिक नियमानुसार ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यम से यह प्रमाण...और पढ़ें

By ramkrashna MuleEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 14 Jun 2026 10:58:09 AM (IST)Updated Date: Sun, 14 Jun 2026 10:58:09 AM (IST)
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फर्जी जाति प्रमाण पत्र बन सकता है भविष्य पर संकट, कानूनन अपराध, उपयोग पर सजा का प्रावधान
फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाना अपराध है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. नौकरी, प्रवेश और छात्रवृत्ति के लिए जरूरी दस्तावेज गलत तरीके से बनवाना कानूनन अपराध
  2. फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त की है, तो उसकी नियुक्ति तत्काल निरस्त की जा सकती है
  3. इसी प्रकार शिक्षा संस्थानों में लिया गया प्रवेश भी रद होने का खतरा रहता है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सरकारी नौकरियों में आवेदन, राज्य एवं केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश तथा छात्रवृत्ति सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए जाति प्रमाण पत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। पात्रता रखने वाले अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नागरिक नियमानुसार ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यम से यह प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनवाना या उसका उपयोग करना गंभीर कानूनी अपराध है।

विधि विशेषज्ञ एडवोकेट अनिरुद्ध जाधव के अनुसार भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनका उपयोग करने अथवा प्रस्तुत करने पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर सात वर्ष तक के कारावास के साथ आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।


यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त की है, तो उसकी नियुक्ति तत्काल निरस्त की जा सकती है। इसी प्रकार शिक्षा संस्थानों में लिया गया प्रवेश भी रद्द होने का खतरा रहता है, जिससे विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित हो सकता है।इतना ही नहीं, फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर प्राप्त आरक्षण, छात्रवृत्ति तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ वापस लिए जा सकते हैं और संबंधित राशि की वसूली भी की जा सकती है। ऐसे मामलों के उजागर होने पर व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी गहरा आघात पहुंचता है। इससे न केवल उसकी विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि संबंधित जाति और समुदाय की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

वैधानिक प्रक्रियां को अपनाकर सही दस्तावेज के अाधार पर बनवाए

विशेषज्ञों का कहना है कि जाति प्रमाण पत्र केवल वैधानिक प्रक्रिया और सही दस्तावेजों के आधार पर ही बनवाना चाहिए। यदि किसी प्रकार की त्रुटि या विसंगति सामने आती है, तो उसका समय रहते सुधार कराना ही समझदारी है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे हासिल किया गया लाभ क्षणिक हो सकता है, लेकिन इसके दुष्परिणाम व्यक्ति के करियर, सम्मान और भविष्य पर लंबे समय तक असर डाल सकते हैं।

इन प्रक्रिया का पालन कर आवेदन करें

  • आपके जाति प्रमाण पत्र सत्र 2000 से पहले जारी हुआ है तो इसे आप डिजिटल करवाना के लिए आधार, जन्म तारीख वाली अंक सूची उपलबध करानी होगी। इसके साथ ही एक पूर्व प्रमाण पत्र भी बनावाना होगा।
  • आवेदक को रक्त संबंध के आधार पर भी जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसके लिए माता-पिता, चाचा, भाई, बहन और दादा का जाति का प्रमाण पत्र देना होगा। इसके साथ अन्य दस्तावेज आधार, समग्र एवं एक फोटो देना होगा।
  • यदि किसी के पास पूर्व जारी प्रमाण पत्र नहीं है तो रक्त संबंधी का प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।

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