
लाइफस्टाइल डेस्क। नई नौकरी का ऑफर लेटर मिलना किसी उपलब्धि से कम नहीं लगता, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चमकता हुआ 'सैलरी पैकेज' आपके मानसिक स्वास्थ्य की कीमत पर तो नहीं मिल रहा? अक्सर उम्मीदवार ऊंचे पद और आकर्षक अंकों के फेर में कंपनी के उन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य में उनके लिए सिरदर्द बन सकते हैं।
जॉइनिंग लेटर पर साइन करना एक कानूनी और मानसिक प्रतिबद्धता है। ऐसे में किसी भी ऑफिस की 'टॉक्सिक' संस्कृति को पहचानने के लिए ये 5 चेतावनी भरे संकेत आपकी मदद कर सकते हैं।
अगर किसी कंपनी में पदों के लिए बार-बार विज्ञापन निकल रहे हैं या वहां पुराने चेहरों की कमी है, तो यह एक बड़ा रेड फ्लैग है। यदि कर्मचारी वहां 6 महीने या 1 साल भी नहीं रुक रहे, तो समझ जाइए कि समस्या सैलरी में नहीं, बल्कि कंपनी के 'मैनेजमेंट कल्चर' में है। खुशहाल ऑफिस वही होता है जहां लोग लंबे समय तक साथ काम करना पसंद करते हैं।
याद रखें, इंटरव्यू सिर्फ कंपनी आपका नहीं लेती, आप भी उस कंपनी को परख रहे होते हैं। यदि इंटरव्यू लेने वाले मैनेजर ने आपको बिना किसी वाजिब कारण के घंटों इंतज़ार करवाया, वे आपसे बात करते समय फोन में व्यस्त थे या आपके सवालों का जवाब रूखेपन से दे रहे थे, तो सतर्क हो जाएं। जो संस्थान जॉइनिंग से पहले आपकी गरिमा का सम्मान नहीं कर सकता, वह जॉइनिंग के बाद आपकी मानसिक शांति का क्या हाल करेगा, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है।
जब आप इंटरव्यू के लिए फिजिकल ऑफिस जाएं, तो वहां की ऊर्जा को महसूस करें। क्या वहां के कर्मचारी तनावग्रस्त होकर स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए हैं? क्या वहां एक-दूसरे से बात करने या मुस्कराने की भी मनाही जैसा माहौल है? यदि ऑफिस में 'लाइब्रेरी' जैसा डरावना सन्नाटा है, तो यह अत्यधिक कार्यभार और सहयोग की कमी का संकेत हो सकता है। एक स्वस्थ कार्यस्थल पर व्यावसायिकता के साथ-साथ थोड़ी हंसी-मजाक की गुंजाइश भी होती है।
अक्सर कंपनियां इंटरव्यू के दौरान कहती हैं, "हम यहां एक परिवार की तरह हैं।" सुनने में यह मधुर लग सकता है, लेकिन कॉर्पोरेट जगत में इसका छिपा हुआ अर्थ अक्सर 'सीमाओं का अभाव' (No Boundaries) होता है। यदि आपका जॉब डिस्क्रिप्शन (JD) स्पष्ट नहीं है और आपसे कहा जा रहा है कि "यहां सबको सब कुछ करना पड़ता है," तो इसका मतलब है कि आपसे बहुआयामी काम तो लिया जाएगा, लेकिन क्रेडिट और स्पष्टता का अभाव रहेगा।
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यदि इंटरव्यू के दौरान आपसे पूछा जाए कि क्या आप 'फ्लेक्सिबल' हैं या देर रात तक काम करने को तैयार हैं, तो यह सीधे तौर पर आपकी पर्सनल लाइफ पर हमले की तैयारी है। जो कंपनियां यह दावा करती हैं कि उन्हें वह लोग पसंद हैं जो "घड़ी देखकर काम नहीं करते," वे अक्सर आपके वीकेंड और निजी समय का सम्मान नहीं करतीं। ऐसी जगहों पर वर्क-लाइफ बैलेंस महज़ एक कागजी शब्द बनकर रह जाता है।
एक टॉक्सिक वर्कप्लेस न केवल आपकी ग्रोथ रोकता है, बल्कि आपके आत्मविश्वास को भी गहरी चोट पहुंचाता है। अगर आपकी 'गट फीलिंग' या अंतर्मन किसी कंपनी को लेकर गवाही नहीं दे रहा, तो दोबारा सोचें। याद रखें, करियर में सही दिशा चुनना, गलत दिशा में तेज़ी से दौड़ने से कहीं बेहतर है।