
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर । आंख की पारदर्शी पुतली (कॉर्निया) पर चोट, संक्रमण या कैल्शियम जमने जैसी बीमारियों के कारण आने वाली सफेदी, जिसे ''कॉर्नियल ओपैसिटी'' कहा जाता है। यह स्थिति मरीजों दृष्टिहीनता के साथ-साथ चेहरे की सुंदरता और व्यक्ति के आत्मविश्वास को प्रभावित करती है। इसके कारण हर उम्र में अलग-अलग होते हैं।
यह कहना है नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रक्षित अग्रवाल का। उन्होंने बताया कि बच्चों में कुपोषण (विटामिन ''ए'' की कमी), जन्मजात दोष या नुकीली चीज़ों से चोट के कारण यह हाेता है। वहीं युवाओं में केमिकल, लोहे के कण गिरना, असुरक्षित कांटैक्ट लेंस के उपयोग या संक्रमण के कारण होता है। वही बुजुर्गों में बढ़ती उम्र, अनियंत्रित मधुमेह व आंख में कैल्शियम जमने से पुतली धुंधली हो जाती है।
यह सफेदी आंख की काली पुतली पर दूधिया धब्बे की तरह दिखती है, जिससे मरीज सामाजिक रूप से असहज महसूस करने लगते हैं। कई बार मरीज इस तरह की स्थितियों को नजरअंदाज करते हैं और उन्हें सही उपचार भी नहीं मिल पाता है।
कॉर्निया पर कैल्शियम जमने की स्थिति में ''इडीटीए केलेशन'' एक अत्यंत सरल, त्वरित और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिससे बिना किसी जटिल सर्जरी के केमिकल तरीके से कैल्शियम को पूरी तरह साफ़ कर दिया जाता है। इस तकनीक से उपचार के दौरान जिन मामलों में रोशनी लौटना संभव न हो, वहां प्रोस्थेटिक (कास्मेटिक) लेंस या कार्नियल टैटूइंग से आंख को प्राकृतिक रूप दिया जा सकता है।
इस तरह मरीज के दोनों आंखे एक समान दिखाई देती है और सामने वाला उसमें अंतर नहीं कर पाता। कई बार आंख में गंभीर कॉर्नियल क्षति होने पर नेत्रदान द्वारा प्राप्त कार्निया प्रत्यारोपण ही स्थायी समाधान होता है।
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