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कम उम्र में ही तंबाकू के संपर्क में आ रहे हैं बच्चे, लंबे समय में जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं

स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों में तंबाकू सेवन की शुरुआत पहले की तुलना में कम उम्र में हो रही है, जिससे लंबे समय में जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिं...और पढ़ें

By Vinay YadavEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Tue, 23 Jun 2026 11:31:52 AM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 11:31:52 AM (IST)
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कम उम्र में ही तंबाकू के संपर्क में आ रहे हैं बच्चे, लंबे समय में जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं
बच्चों में बढ़ रहा तंबाकू का चलन। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. तंबाकू सेवन के स्वरूप में एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है
  2. स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों में तंबाकू सेवन की शुरुआत पहले की तुलना में कम उम्र में हो रही है
  3. इससे लंबे समय में जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर में तंबाकू सेवन के स्वरूप में एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों में तंबाकू सेवन की शुरुआत पहले की तुलना में कम उम्र में हो रही है, जिससे लंबे समय में जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं।

यह कहना है मनोचिकित्सक डॉ. राजवर्धन भंवर का। उन्होंने कहा कि हाल ही में जिला स्तरीय तंबाकू नियंत्रण कार्यशालाओं में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे के अनुसार मध्य प्रदेश में 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के 3 से 9 प्रतिशत छात्र पहले से ही किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं।


नियमों के बावजूद शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता बनी हुई है

इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि स्कूलों और प्रवर्तन एजेंसियों से मिले संकेत बताते हैं कि नियमों के बावजूद शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता बनी हुई है। इससे बच्चे कम उम्र में ही तंबाकू के संपर्क में आ रहे हैं, जब वे सबसे अधिक प्रभावित होने की अवस्था में होते हैं।

लत लगने की संभावना अधिक मजबूत हो जाती है

बच्चे पहले की तुलना में कम उम्र में निकोटिन के संपर्क में आ रहे हैं। यदि ऐसा किशोरावस्था में होता है, तो इसका असर मस्तिष्क के विकास पर पड़ता है और लत लगने की संभावना अधिक मजबूत हो जाती है। ऐसे में जब ये बच्चे वयस्क होते हैं, तब धूम्रपान छोड़ना उनके लिए कहीं अधिक कठिन हो जाता है।

जागरूकता बढ़ने के बावजूद धूम्रपान छोड़ने की दर अब भी कम है

वैश्विक स्तर पर उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश वयस्क धूम्रपान करने वालों ने 18 वर्ष की आयु से पहले ही इसकी शुरुआत कर दी थी। जागरूकता बढ़ने के बावजूद धूम्रपान छोड़ने की दर अब भी कम है। कई युवा धूम्रपान छोड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन चिड़चिड़ापन, बेचैनी और धूम्रपान की तीव्र इच्छा जैसे विड्राल लक्षणों के कारण दोबारा इसकी ओर लौट जाते हैं।

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