
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भारतीय संस्कृति, योग और अध्यात्म का प्रभाव केवल देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विदेशों में भी फैल रहा है। भोपाल में आने वाले विदेशी पर्यटक सिर्फ ऐतिहासिक स्थलों और खानपान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को अपने जीवन और व्यक्तित्व का हिस्सा भी बना रहे हैं। इसका उदाहरण शरीर पर बनवाए जा रहे भारतीय आध्यात्मिक टैटू हैं।
भगवान शिव, हनुमान, ‘ॐ’, त्रिशूल, मंडला कला और संस्कृत श्लोकों वाले टैटू विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। शहर के कई टैटू कलाकारों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में विदेशी ग्राहकों की संख्या बढ़ी है और उनमें भारतीय धार्मिक प्रतीकों को लेकर विशेष आकर्षण देखा जा रहा है। खास बात यह है कि विदेशी ग्राहक केवल डिजाइन देखकर टैटू नहीं बनवाते, बल्कि उससे जुड़े धार्मिक सांस्कृतिक अर्थ को भी समझना चाहते हैं।
भोपाल के कोलार क्षेत्र में टैटू की दुकान संचालित करने वाले भरत शर्मा का कहना है कि विदेशी पर्यटक भारतीय धार्मिक प्रतीकों को केवल फैशन के रूप में नहीं देखते, बल्कि उसे अपनी सोच व जीवनशैली से जोड़कर अपनाते हैं। भरत बताते हैं कि विदेशी ग्राहकों में त्रिशूल और संस्कृत मंत्रों वाले टैटू की मांग अधिक रहती है।
कई लोग पहले इन प्रतीकों का अर्थ समझते हैं, फिर उसे अपने शरीर पर बनवाते हैं। उन्हें लगता है कि भारतीय आध्यात्मिक चिह्न जीवन में सकारात्मकता और संतुलन लाते हैं। साथ ही सामाजिक माध्यमों और योग के बढ़ते प्रभाव के कारण भी विदेशी युवाओं में भारतीय अध्यात्म के प्रति आकर्षण बढ़ा है। यही वजह है कि अब टैटू केवल फैशन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति से जुड़ाव व आत्मिक शांति का प्रतीक बन रहे हैं।
रोहित नगर में टैटू स्टूडियो संचालित करने वाली पेशेवर टैटू कलाकार नैना जैन के अनुसार विदेशी पर्यटक भारतीय अध्यात्म से काफी प्रभावित हैं। वे टैटू बनवाने से पहले प्रतीकों और उनसे जुड़ी मान्यताओं की जानकारी लेते हैं। जापान से आए एक पर्यटक ने भगवान शिव का टैटू बनवाया और शिव के ध्यान व ऊर्जा के महत्व को समझा। नैना के अनुसार अब युवाओं में पारंपरिक भारतीय आध्यात्मिक प्रतीकों वाले टैटू की मांग तेजी से बढ़ रही है।
यह भी पढ़ें : इंदौर में पुलिस के लिए सिर्फ केस दर्ज करना नहीं, समय पर चार्जशीट देना असली कसौटी