
लाइफस्टाइल डेस्क। पब्लिक टॉयलेट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन कभी यह सुविधा दुनिया के लिए किसी अजूबे से कम नहीं थी। एक समय ऐसा था जब सड़कों पर सार्वजनिक शौचालय मौजूद ही नहीं थे, जिससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
खासतौर पर महिलाओं के लिए यह स्थिति बेहद असुविधाजनक थी और स्वच्छता के लिहाज से भी हालात चिंताजनक थे। लेकिन एक शख्स की दूरदर्शी सोच ने न सिर्फ लंदन, बल्कि पूरी दुनिया में पब्लिक हाइजीन की तस्वीर बदल दी। यह कहानी है उस ऐतिहासिक शुरुआत की, जिसने आधुनिक सार्वजनिक शौचालयों की नींव रखी।
एक प्लंबर जिसने इतिहास रच दिया
सार्वजनिक स्वच्छता की दिशा में यह क्रांतिकारी कदम उठाया था George Jennings, जो पेशे से प्लंबर और सैनिटरी इंजीनियर थे। साल 1851 में आयोजित Great Exhibition के दौरान उन्होंने पहली बार आम लोगों के सामने फ्लश टॉयलेट की सुविधा पेश की।
यह प्रयोग उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रहा। करीब 8.27 लाख लोगों ने एक पेनी चुकाकर इन टॉयलेट्स का इस्तेमाल किया। दिलचस्प बात यह थी कि इस छोटी-सी रकम में लोगों को साफ सीट के साथ तौलिया, कंघी और यहां तक कि जूते पॉलिश जैसी सुविधाएं भी दी जाती थीं।
स्वच्छता इतिहास की अहम तारीख
प्रदर्शनी की सफलता के बाद 2 फरवरी 1852 को लंदन की सड़कों पर पहली बार स्थायी सार्वजनिक फ्लशिंग टॉयलेट्स खोले गए। उस समय इन्हें पब्लिक वेटिंग रूम्स कहा जाता था।
पुरुषों के लिए पहला टॉयलेट 95 फ्लीट स्ट्रीट पर शुरू हुआ, जबकि कुछ दिनों बाद महिलाओं के लिए 51 बेडफोर्ड स्ट्रीट पर यह सुविधा उपलब्ध कराई गई। यहां लगे वॉटर क्लोसेट्स का इस्तेमाल करने के लिए 2 पेनी शुल्क रखा गया था, जबकि हाथ धोने या ब्रश जैसी सेवाओं के लिए अलग से पैसे देने होते थे।
जब बदबू ने हिला दी पूरी सरकार
विक्टोरियन दौर में लंदन की सफाई व्यवस्था बेहद खराब थी। शहर का सारा कचरा और गंदगी सीधे River Thames में डाल दी जाती थी। इसका नतीजा यह हुआ कि 1858 में शहर भीषण दुर्गंध की चपेट में आ गया, जिसे इतिहास में Great Stink के नाम से जाना जाता है।
हालात इतने खराब हो गए कि सरकार को तत्काल बड़े सुधारों पर काम करना पड़ा।
आधुनिक सीवर सिस्टम की नींव
इस गंभीर समस्या का समाधान पेश किया इंजीनियर Joseph Bazalgette ने। उन्होंने एक अंडरग्राउंड सीवर सिस्टम डिजाइन किया, जिसने शहर की गंदगी को आबादी से दूर पहुंचाना शुरू किया।
हैरानी की बात यह है कि उस दौर में बना यह सीवर सिस्टम आज भी London में प्रभावी रूप से काम कर रहा है और इसे आधुनिक शहरी स्वच्छता की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।
एक सोच जिसने बदली दुनिया
जॉर्ज जेनिंग्स के फ्लश टॉयलेट और जोसेफ बेजलजेट के सीवर सिस्टम ने मिलकर न केवल लंदन को बदला, बल्कि पूरी दुनिया को सार्वजनिक स्वच्छता का एक नया रास्ता दिखाया। आज जो सुविधा हमें आम लगती है, उसके पीछे इतिहास की एक लंबी और प्रेरक कहानी छिपी है।
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