
राहुल रैकवार, नईदुनिया जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर अपनी कला और संस्कृति के साथ-साथ अपने अनूठे खान-पान के लिए भी देशभर में पहचानी जाती है। शहर के स्ट्रीट फूड का जिक्र होते ही समोसा, मंगौड़ा और आलू बड़ा जैसे व्यंजनों का नाम जुबान पर आ जाता है।
इन दिनों जबलपुर के स्वाद प्रेमियों के बीच केवल समोसा ही नहीं, बल्कि उसके साथ परोसी जाने वाली एक खास 'चटनी' चर्चा का विषय बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि समोसे का असली स्वाद चटनी पर निर्भर करता है, और इसी फार्मूले को अपनाकर शहर के कुछ विक्रेता ग्राहकों के दिलों पर राज कर रहे हैं।
विशेष रूप से सिंधी कैंप के पास स्थित भानतलैया क्षेत्र इन दिनों 'चटनी के शौकीनों' का नया ठिकाना बन गया है। यहां मिलने वाली अदरक और पुदीना की चटनी ने समोसे के स्वाद को दो गुना कर दिया है।
अदरक की तीखी खुशबू और पुदीने की ताजगी का ऐसा अनूठा संगम तैयार किया जाता है कि समोसे का हर निवाला यादगार बन जाता है। यही कारण है कि दूर-दराज के इलाकों से लोग केवल इस विशेष स्वाद का आनंद लेने के लिए भानतलैया खिंचे चले आते हैं।
शाम ढलते ही यहां का नजारा किसी उत्सव जैसा होता है। दुकान पर शाम 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक पैर रखने की जगह नहीं होती। यहां केवल समोसे ही नहीं, बल्कि गरमा-गरम मंगौड़े और आलू बड़े भी उसी मशहूर अदरक-पुदीना चटनी के साथ परोसे जाते हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि चटनी का यह स्वाद वर्षों से बरकरार है। दुकानदारों ने भी समय के साथ यह समझ लिया है कि ग्राहकों को बांधे रखने के लिए मुख्य व्यंजन से ज्यादा उसकी सहायक सामग्री यानी चटनी की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है।
जबलपुर के अन्य हिस्सों में भी अब इस ट्रेंड को देखा जा रहा है, जहां विक्रेता चटनी के साथ नए प्रयोग कर रहे हैं। हालांकि, भानतलैया का अदरक-पुदीना तड़का आज भी अपनी बादशाहत कायम रखे हुए है। जबलपुर की इन गलियों में मिलने वाला यह स्वाद आपकी शाम को जायकेदार बनाने के लिए काफी है।
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