नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गर्मियों और शुरुआती मानसून का पसंदीदा फल जामुन इन दिनों बाजारों में खूब नजर आ रहा है। आवक बढ़ने से इसके दामों में भी गिरावट आई है। कुछ दिन पहले तक 320 से 400 रुपये प्रति किलो बिकने वाला जामुन अब 150 से 200 रुपये किलो के भाव पर उपलब्ध है। कीमतें कम होने से जहां आमजन को राहत मिली है, वहीं स्वास्थ्य लाभों के कारण इसकी मांग भी बढ़ गई है।
आयुर्वेद में जामुन को औषधीय गुणों से भरपूर फल माना जाता है। खास बात यह है कि इसके फल, बीज और लकड़ी तक कई तरह से उपयोगी माने जाते हैं। यही वजह है कि जामुन केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पारंपरिक उपयोगों के लिए भी लोगों की पसंद बना हुआ है।
पुरानी परंपरा, बड़ा फायदा
ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से कुओं और पानी की टंकियों में जामुन की लकड़ी का टुकड़ा डालने की परंपरा रही है। माना जाता है कि इससे पानी लंबे समय तक ताजा और उपयोग योग्य बना रहता है।
बीज मत फेंकिये, नया पेड़ उगाइए
जामुन खाने के बाद अधिकांश लोग उसके बीज फेंक देते हैं, जबकि यही बीज एक विशाल और फलदार पेड़ का रूप ले सकता है। ताजे बीजों को मिट्टी में बोकर घर, बगीचे या खेत में आसानी से पौधा तैयार किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है, बल्कि भविष्य में फल और छांव का लाभ भी मिलता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए क्यों खास है जामुन
जामुन के बीजों में जम्बोलिन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जिन्हें पारंपरिक चिकित्सा में ब्लड शुगर प्रबंधन के लिए उपयोगी माना जाता है। बीजों का चूर्ण लंबे समय से आयुर्वेदिक उपयोग में लिया जाता रहा है।
जामुन की लकड़ी प्राकृतिक वाटर फिल्टर की तरह
जामुन के पेड़ की लकड़ी को भी पारंपरिक रूप से उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण पानी में हानिकारक सूक्ष्मजीवों और काई के विकास को रोकने में सहायक माने जाते हैं।
जामुन में मौजूद विटामिन सी, आयरन और एंटीआक्सीडेंट्स शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। वहीं पोटेशियम हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। फाइबर की अधिक मात्रा पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और पेट संबंधी समस्याओं को कम करने में सहायक होती है। -डॉ. केएल शर्मा, आयुर्वेद चिकित्सक।