
हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। लिपस्टिक मेकअप का सबसे आम हिस्सा है, लेकिन इसे लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल होते रहते हैं। कभी कहा जाता है कि लिपस्टिक में जहरीले केमिकल होते हैं, तो कभी इसे कैंसर से जोड़ दिया जाता है। हालांकि, वैज्ञानिक तौर पर तस्वीर इतनी सीधी नहीं है।
हर लिपस्टिक नुकसानदायक नहीं होती। समस्या मुख्य रूप से किसी खास इनग्रिडियंट से एलर्जी या इरिटेशन, खराब गुणवत्ता वाले या कॉन्टैमिनेटेड प्रोडक्ट्स और गलत तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर हो सकती है।
लिपस्टिक की नॉर्मल प्रोडक्ट्स में मुख्य रूप से वैक्स, और ऑयल रंग देने वाले पिगमेंट्स या डाइस होते हैं। इसके अलावा प्रोडक्ट की टेक्चर, टिकाऊपन और खुशबू के लिए पॉलिमर्स, अल्कोहल, इस्टर्स, फ्रेगनेंस और प्रजरवेटिव्स जैसे इनग्रिडियंट भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
1. वैक्स और ऑयल
वैक्स और ऑयल लिपस्टिक को सॉलेड शेप देने के साथ उसे होंठों पर आसानी से फैलने में मदद करते हैं। कई फॉर्म्युलेशन में ये इनग्रिडियंट प्रोडक्ट का बड़ा हिस्सा होते हैं।
2. पिगमेंट्स और डाइज
लिपस्टिक का रंग पिगमेंट्स और डाइज से आता है। अलग-अलग प्रोडक्ट में लेबल्स, मिरल कम्पाउंड्स, इनऑर्गेनिक इनग्रिडियंट और चमक के लिए मिका जैसे इनग्रिडियंट इस्तेमाल हो सकते हैं।
3. फ्रेगनेंस और फ्लेवर
कुछ लिप प्रोडक्ट में खुशबू या स्वाद के लिए फ्रेगनेंस और फ्लेवरिंग इनग्रिडियंट डाले जाते हैं। ज्यादातर लोगों में इनसे कोई समस्या नहीं होती, लेकिन संवेदनशील लोगों में ये इरिटेशन या एलर्जिक रिएक्शन पैदा कर सकते हैं।
4. प्रजरवेटिव्स
प्रजरवेटिव्स का इस्तेमाल प्रोडक्ट को खराब होने और इन्फेक्शन ग्रोथ से बचाने के लिए किया जाता है। हालांकि, कुछ लोगों की त्वचा कुछ कॉस्मेटिक इनग्रिडियंटs के प्रति संवेदनशील हो सकती है।
लिपस्टिक और दूसरे लिप-केयर प्रोडक्ट से जुड़ी एलर्जिक कॉन्टैक्ट डरमाइटिस एक समस्या है। एक रिव्यू में लिप-केयर कॉस्मेटिक से जुड़े एलर्जिक रिएक्शन के मामलों की समीक्षा की गई थी। इसमें लिपस्टिक, लिप बाल्म, लिप ग्लौस और लिप लाइनर जैसे प्रोडक्ट शामिल थे।
कुछ मामलों में castor oil, benzophenone-3, gallates, wax और colophony जैसे इनग्रिडियंट से एलर्जिक रिएक्शन की पहचान हुई।
इसके लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
अगर हर बार किसी खास लिपस्टिक को लगाने के बाद इसी तरह की समस्या होती है, तो किसी इनग्रिडियंट से सेंसिटिविटी की संभावना हो सकती है।
हर लिपस्टिक ऐसा नहीं करती। लेकिन कुछ फॉर्म्युलेशन या फ्रेगनेंस और फ्लेवरिंग इनग्रिडियंट संवेदनशील होंठों में इरिटेशन बढ़ा सकते हैं।
बार-बार इरिटेशन होने पर होंठ सूखे, पपड़ीदार या फटे हुए महसूस हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में प्रोडक्ट का इस्तेमाल रोकना बेहतर है।
लिपस्टिक को लेकर सबसे ज्यादा वायरल दावों में से एक है कि इसमें lead होता है और इसे लगाने से कैंसर हो सकता है। इस दावे को सीधे तथ्य की तरह पेश करना सही नहीं है।
कुछ कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में trace कॉन्टैमिनेट्स पाए जाने की संभावना होती है, इसलिए एजेंसीज इनके स्तर पर निगरानी करती हैं।
अमेरिकी FDA ने कॉस्मेटिक लिप प्रोडक्ट में लेड की जांच की है और कॉस्मेटिक में लेड को इम्पोरिटी के तौर पर सीमित करने के लिए 10 ppm का rमैक्सिमम लेवल रखा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर लिपस्टिक में खतरनाक मात्रा में लेड मौजूद है या हर लिपस्टिक जहरीली है।
सिर्फ लिपस्टिक लगाने को सीधे कैंसर का कारण बताने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। इसलिए “लिपस्टिक से कैंसर होता है” जैसी सीधी बात वैज्ञानिक तौर पर भ्रामक हो सकती है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स और रेगुलेटरी एजैंसी का फोकस कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में इस्तेमाल होने वाले इनग्रिडियंट और संभावित कॉन्टैमिनेट्स की सुरक्षा पर रहता है। इसलिए भरोसेमंद और अच्छे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है।
लिपस्टिक को अपने आप में “जहरीला” कहना सही नहीं है। कुछ इनग्रिडियंट संवेदनशील लोगों में एलर्जी या इरिटेशन पैदा कर सकते हैं, जबकि खराब गुणवत्ता या कॉन्टैमिनेटेड कॉस्मेटिक प्रोडक्ट अलग चिंता का विषय हो सकते हैं।
इसलिए लिपस्टिक छोड़ने की बजाय भरोसेमंद प्रोडक्ट चुनना, इनग्रिडियंट और एक्सपायरी देखना और किसी रिएक्शन को नजरअंदाज न करना ज्यादा जरूरी है।
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