
लाइफस्टाइल डेस्क। आज 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने जा रही हैं। लेकिन बजट भाषण से पहले ही उनका लुक चर्चा में आ जाता है। बीते वर्षों में उन्होंने अपनी साड़ियों के माध्यम से न केवल फैशन बल्कि भारतीय कारीगरों की परंपरा, संस्कृति और हस्तशिल्प को भी राष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाया है।
2019 से लेकर 2025 तक निर्मला सीतारमण का हर बजट लुक एक संदेश देता रहा है। उनके पहनावे में देश के अलग-अलग राज्यों की बुनाई, कढ़ाई और कला की झलक साफ दिखाई देती है। यह केवल एक स्टाइल स्टेटमेंट नहीं, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ और भारतीय विरासत के संरक्षण की सोच का प्रतीक बन चुका है।
अपने पहले बजट भाषण में उन्होंने आंध्र प्रदेश की मंगलगीरी सिल्क साड़ी पहनी थी। गुलाबी रंग और सुनहरे बॉर्डर वाली इस साड़ी के साथ उन्होंने चमड़े के ब्रीफकेस की जगह पारंपरिक लाल ‘बही-खाता’ अपनाकर एक नई परंपरा की शुरुआत की।
कोरोना काल के बीच प्रस्तुत बजट में वे पीले और सुनहरे रंग की सिल्क साड़ी में नजर आईं। भारतीय संस्कृति में पीला रंग शुभता, आशा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जो उस कठिन समय में सकारात्मक संदेश देता नजर आया।
साल 2021 में उन्होंने तेलंगाना की पोचमपल्ली (इकत) साड़ी पहनी। लाल और ऑफ-व्हाइट रंगों का संयोजन भारतीय विरासत और आधुनिक बदलावों के बीच संतुलन को दर्शाता रहा।
इस वर्ष उनका चयन ओडिशा की पारंपरिक बोमकाई साड़ी रही। रस्ट कलर और सफेद बॉर्डर वाली यह साड़ी राज्य की जमीनी संस्कृति और हस्तशिल्प की बारीकी को सामने लाती है।
साल 2023 में कर्नाटक की कसूती कढ़ाई वाली लाल रेशमी साड़ी उनके बजट लुक का केंद्र रही। काले रंग की टेंपल बॉर्डर और लाल रंग की ऊर्जा उनके दृढ़ संकल्प और कार्यशैली का प्रतीक बनी।
अंतरिम बजट 2024 में उन्होंने पश्चिम बंगाल की कांथा कढ़ाई वाली नीली तुसर सिल्क साड़ी पहनी। यह हाथ की सिलाई भारत की वस्त्र विविधता और ग्रामीण कारीगरी की पहचान बनी।
पूर्ण बजट 2024-25 में उनका लुक ऑफ-व्हाइट हथकरघा साड़ी का रहा, जिसमें मैजेंटा बॉर्डर था। सफेद रंग नई शुरुआत और पारदर्शिता का प्रतीक माना जाता है।
2025 में उन्होंने बिहार की मधुबनी कला से सजी ऑफ-व्हाइट सिल्क साड़ी पहनी, जिसे पद्म पुरस्कार विजेता दुलारी देवी ने उपहार में दिया था। साड़ी पर बनी मछली की आकृति सुख, समृद्धि और विकास का प्रतीक है, जो बजट के उद्देश्य से मेल खाती है।