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कम उम्र में चश्मा, युवाओं में ‘ड्राई आई’ का बढ़ता खतरा; मोबाइल-लैपटॉप के लगातार उपयोग का असर

इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में 2022 में 15 हजार मरीज आए थे, 2025 में यह संख्या 98 हजार पहुंच गई।

By Vinay YadavEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 22 Jun 2026 11:48:32 AM (IST)Updated Date: Mon, 22 Jun 2026 12:34:40 PM (IST)
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कम उम्र में चश्मा, युवाओं में ‘ड्राई आई’ का बढ़ता खतरा; मोबाइल-लैपटॉप के लगातार उपयोग का असर
लगातार स्क्रीन को देखने से बढ़ रही आंखों की समस्याएं। - एआई इमेज

HighLights

  1. डिजिटल युग में मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट का बढ़ता उपयोग युवाओं की आंखों के लिए खतरा बन रहा है
  2. कम उम्र में चश्मा लगने के मामले 20% बढ़े हैं, ऑनलाइन होमवर्क, वीडियो गेम से नजर कमजोर हो रही है
  3. कंप्यूटर पर काम करने वालों में ड्राई आई की समस्या 20 प्रतिशत तक बढ़ी है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। डिजिटल युग ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ एक नई स्वास्थ्य चुनौती भी तेजी से सामने आ रही है। यह स्थिति अकेले किसी शहर की नहीं है। प्रदेश भर में मोबाइल, लैपटाप, टैबलेट और अन्य डिजिटल स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता अब लोगों की आंखों की सेहत पर असर डाल रही है।

इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फार आई सहित शहर के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में आंखों की समस्याओं वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार आंखों में जलन, सूखापन, धुंधलापन, सिरदर्द और आंखों की थकान जैसी शिकायतें अब आम हो गई हैं।


बढ़ रही मरीजों की संख्या

स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फार आई में वर्ष 2022 में करीब 15 हजार मरीज उपचार के लिए यहां पहुंचे थे, वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर लगभग 98 हजार तक पहुंच गई। अधीक्षक डा. डीके शर्मा ने बताया कि अस्पताल में मरीजों को आधुनिक इलाज की सुविधा मिल रही है। निजी सेंटर से कम दाम में मरीज का इलाज हो रहा है। बेहतर उपचार मिलने से मरीजों का अब शासकीय अस्पतालों में इलाज करवाने को लेकर भी भरोसा बढ़ा है।

बच्चों में चश्मा लगने के मामले 20 प्रतिशत बढ़े

विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों में कम उम्र में चश्मा लगने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले ऐसे मामले अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते थे, लेकिन अब इनमें लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसकी बड़ी वजह है स्कूलों का होमवर्क मोबाइल और आनलाइन प्लेटफार्म के जरिए मिलने लगा है। इसके अलावा बच्चे घंटों तक वीडियो गेम खेलते हैं और इंटरनेट मीडिया पर समय बिताते हैं, जिससे नजर कमजोर होने लगी है।

कंप्यूटर के उपयोग से बढ़ी समस्या

आफिस और संस्थानों में कंप्यूटर स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने वाले युवाओं में ड्राई आई की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले चार-पांच वर्षों में ऐसे मामलों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीजों में आंखों की समस्याओं का खतरा अधिक होता है। मधुमेह आंखों की बारीक रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है, जिससे दृष्टि संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे मरीजों में मोतियाबिंद जल्दी होने की संभावना भी अधिक रहती है।

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युवा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

डिजिटल उपकरण आज की जरूरत हैं, लेकिन उनका संतुलित उपयोग ही आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकता है। आंखों में लगातार जलन, सूखापन या धुंधलापन महसूस होने पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि छोटी दिखने वाली समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है। हमारे पास इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। इसमें सबसे अधिक युवा वर्ग शामिल है। - डॉ. ऋषि गुप्ता, नेत्र रोग विशेषज्ञ

स्क्रीन टाइम बढ़ने के कारण नंबर बढ़ रहे

बच्चों में स्क्रीन टाइम बढ़ने के कारण नंबर बढ़ रहे हैं। शोध बताते हैं कि 2050 तक हर दूसरे बच्चे को चश्मा लग जाएगा। माता-पिता को ध्यान देना चाहिए कि बच्चे बाहर खेलने भी जाएं। स्क्रीन का उपयोग करने के दौरान लोग पलक नहीं झपकते हैं। इसके कारण ड्रायनेस की समस्या होती है। यदि हम जागरूक रहेंगे तो इन समस्याओं से बचाव कर सकते हैं। - डॉ. रोहित अग्रवाल, नेत्र रोग विशेषज्ञ