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जबलपुर का स्‍वाद : जिम जाने वाले युवाओं ने बदला अपना स्‍पेशल प्रोटीन शेक, अब सेहत के साथ शक्‍त‍ि भी

कभी 'गरीबों का भोजन' कहा जाने वाला सत्तू अब 'एलिट क्लास' और फिटनेस फ्रीक युवाओं की पहली पसंद है। गर्मी का 'देसी सुरक्षा कवच' बना सत्तू, 'पारंपरिक आयुर...और पढ़ें

By Rahul RaikwarEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 08 May 2026 09:55:11 AM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jun 2026 02:04:52 PM (IST)
जबलपुर का स्‍वाद : जिम जाने वाले युवाओं ने बदला अपना स्‍पेशल प्रोटीन शेक, अब सेहत के साथ शक्‍त‍ि भी
15 दिनों में सत्तू की पिसाई के काम में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। सौजन्‍य सोशल मीडिया

HighLights

  1. शहर की चक्कियों पर बढ़ी भीड़
  2. जिम जाने वाले युवाओं का 'पसंदीदा'
  3. ब्रांडेड कंपनियों के नहीं घर का प्रोटीन शेक

राहुल रैकवार, नईदुनिया, जबलपुर। जैसे-जैसे सूर्य देव के तेवर तीखे हो रहे हैं और पारा 40 डिग्री के पार जाने को बेताब है, संस्कारधानी के लोग अब फ्रिज के कृत्रिम ठंडे पानी और कार्बोनेटेड साफ्ट ड्रिंक्स से किनारा करने लगे हैं।

किराना स्टोर से लेकर आटा चक्कियों तक भीड़

इस भीषण गर्मी में शहरवासी अपनी सेहत की सुरक्षा के लिए सदियों पुराने 'पारंपरिक आयुर्वेद' और 'देसी खान-पान' की ओर लौट रहे हैं। यही कारण है कि इन दिनों शहर के किराना स्टोर से लेकर आटा चक्कियों तक, 'सत्तू' की मांग में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है।


सत्तू की मांग 30 प्रतिशत अधिक

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जबलपुर के लार्डगंज, गढ़ा और रांझी के किराना व्यापारी बोले- इस साल सत्तू की मांग पिछले वर्ष की तुलना में करीब 30 प्रतिशत अधिक है। लोग मिलावट के डर से अब ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट बंद सत्तू के बजाय खुद अपनी निगरानी में इसे तैयार करवाना पसंद कर रहे हैं।

लोग चने खरीदकर चक्की में पिसवा रहे

किराना स्टोरों पर भुने हुए चने और चने की दाल की बिक्री बढ़ गई है। लोग चने खरीदकर उसे स्थानीय चक्की में पिसवा रहे हैं। चक्की संचालक बोले- 15 दिनों में सत्तू की पिसाई के काम में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। ग्राहकों का मानना है कि घर पर तैयार सत्तू न केवल शुद्ध होता है, बल्कि उसकी खुशबू और स्वाद भी बाजार वाले सत्तू से कहीं बेहतर होता है।

देसी प्रोटीन शेक

हाई-प्रोटीन और लो-कैलोरी इसे वर्कआउट के बाद का एक बेहतरीन आहार बनाती है।

देसी प्रोटीन शेक यानी डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह किसी वरदान से कम नहीं है।

घर कासत्‍तू 'लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स' रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

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घंटों पेट भरा रखता है और देता है एनर्जी

लोग, जो सुबह जल्दी आफिस निकलते हैं, उनके लिए सत्तू का नमकीन शरबत (प्याज, मिर्च और नींबू के साथ) एक 'क्विक मील' बन गया है, जो घंटों तक पेट को भरा रखता है और एनर्जी बनाए रखता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से सत्तू के कई लाभ हैं। शा. आयुर्वेद कालेज, जबलपुर के डा. रामकुमार अग्रवाल बताते हैं कि आयुर्वेद में सत्तू को 'शीतल' और 'बलवर्धक' माना गया है।

जानें यह भी

  • 100 ग्राम सत्तू में लगभग 20-25 ग्राम प्रोटीन होता है।
  • आयरन और मैग्नीशियम: एनिमिया को दूर करने में सहायक है।
  • पिसाई में वृद्धि: शहर की चक्कियों पर 20% बढ़ा काम।
  • सत्तू की डिमांड से देसी उत्पाद को भी मिल रहा बढ़ावा।

शरबत से लेकर पराठे तक सत्तू की महक

सत्तू की खासियत यह है कि इसे कई रूपों में खाया जा सकता है। घरों में इसे मुख्य रूप से चार तरीकों से परोसा जा रहा है।

  • नमकीन ड्रिंक: पानी या छाछ में सत्तू, काला नमक, भुना जीरा, बारीक कटा प्याज और नींबू मिलाकर।
  • मीठा शरबत: गुड़ या शक्कर के साथ सत्तू का घोल, जो बच्चों को बहुत पसंद आता है।
  • सत्तू पराठा: सत्तू में मंगरैला, अजवाइन, अचार का मसाला और सरसों तेल मिलाकर बनाई गई स्टफिंग के पराठे।
  • सत्तू के लड्डू: घी और सोंठ के साथ बने सत्तू के लड्डू, जो एक हेल्दी स्नैक का काम करते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार मुख्य लाभ

  1. तापमान नियंत्रण: सत्तू की तासीर ठंडी होती है, जो चिलचिलाती धूप में भी शरीर के आंतरिक तापमान को बढ़ने नहीं देती।
  2. लू से सुरक्षा: घर से सत्तू पीकर निकलने पर लू लगने का खतरा लगभग शून्य हो जाता है क्योंकि यह शरीर को हाइड्रेटेड रखता है।
  3. पाचन और गट हेल्थ: इसमें मौजूद उच्च फाइबर कब्ज की समस्या को दूर करते हैं और पाचन तंत्र को सुचारू बनाते हैं।
  4. नेचुरल डिटाक्स: यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी सहायक है।

सत्तू पचने में हल्का, शरीर को ठंडक देने वाला व हाइड्रेशन बनाए रखने में सहायक है। यह कोल्ड ड्रिंक्स की तुलना में अधिक स्वास्थ्यवर्धक है। सत्तू में मौजूद प्रोटीन व फाइबर पाचन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि हेल्थ को भी मजबूत करते हैं।

- डा. रामकुमार अग्रवाल, शासकीय आयुर्वेद कालेज, जबलपुर

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