
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। वैश्विक संकट से उबरने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनता से ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की बचत का आह्वान कर रहे हैं। बालाघाट में भी प्रशासनिक स्तर पर शीर्ष अधिकारियों ने ‘कारपूलिंग’ कर इस अपील को आदत में शामिल करने की कोशिश शुरू कर दी है, लेकिन कुछ अधिकारियों के लिए ‘बचत’ से ज्यादा ‘सुकून’ महत्वपूर्ण है।
मामला खनिज कार्यालय का है, जहां शुक्रवार दोपहर जिला खनिज अधिकारी तथा उप संचालक फरहत जहां के कार्यालय के बाहर धूप में खड़ा सरकारी वाहन (बोलेरो) 20 मिनट से अधिक देर तक एसी चालू रखकर खड़ा रहा, ताकि ‘मेडम’ (फरहत जहां) के वाहन में बैठते समय उन्हें ठंडक मिले।
मिनटों तक एसी और वाहन चालू रहा और डीजल जलता रहा। वाहन के अंदर न अधिकारी थीं, न ही चालक। चालक छांव में बैठा रहा और खनिज अधिकारी अपने कार्यालय में थीं। काम निपटाकर जैसे ही फरहत जहां ने कक्ष से बाहर निकलने की तैयारी की, एक कर्मी ने चालक को ‘मेडम’ के बाहर आने की जानकारी दी।
चालक ने भी फुर्ती दिखाई और तुरंत गाड़ी बंद कर दी। इसके बाद खनिज अधिकारी वाहन में बैठकर लंच के लिए घर रवाना हो गईं। खास बात यह रही कि इस वाहन में दोनों तरफ नंबर प्लेट नहीं है। पीछे की तरफ मप्र शासन लिखा है।
किसी अधिकारी के अपने सरकारी वाहन में बैठने से पहले मिनटों तक एसी चालू रखने की परंपरा नई नहीं है। कई अधिकारी चालक को पहले ही निर्देश दे चुके होते हैं कि फील्ड पर या घर जाने से पहले एसी चालू रखना, ताकि कार के अंदर बैठने पर तुरंत गर्मी का अहसास न हो। कई मामलों में चालक स्वयं से अधिकारी को खुश करने के लिए मिनटों तक एसी चालू रखकर यहां-वहां भटकते हैं।
बड़ा सवाल है कि आखिर इस फिजूलखर्ची के लिए कौन जिम्मेदार है? अधिकारी या वाहन चालक? अधिकारी अपने सुकून और राहत के लिए सरकारी कोष से भराया जाने वाला डीजल-पेट्रोल यूं ही जला रहे हैं। वह भी तब, जब देश के प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश के मुखिया अधिकारियों से लेकर नेता, व्यापारी, आम जनता से ईंधन बचाने का आह्वान कर रहे हैं। (नोट: इस संबंध में जब जिला खनिज अधिकारी फरहत जहां से संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।)
बालाघाट में भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील का असर दिखने लगा है। शुक्रवार को कई अधिकारी कलेक्ट्रेट और फील्ड पर पहुंचने के लिए अपने सरकारी वाहन साझा करते नजर आए। कलेक्टर मृणाल मीना ने प्रशासनिक स्तर पर कारपूलिंग को लेकर कार्ययोजना बनाई है। शुक्रवार को अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) डीपी बर्मन और जीएस धुर्वे ने कार साझा की।
दोनों अधिकारी एक ही वाहन से कलेक्ट्रेट पहुंचे और उसी वाहन से अपने निवास स्थल के लिए रवाना हुए। इसी तरह डिप्टी कलेक्टर, ज्वाइंट कलेक्टर ने भी कारपूलिंग की। तहसील स्तर पर अधिकारियों को कारपूलिंग के निर्देश दिए गए, जिसका पालन कर आम जनता को भी ईंधन बचाने का संदेश दिया गया।
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ईंधन बचाने की अपील को भाजपा नेता सुरजीत सिंह ठाकुर ने पर्यावरण व सेहत के लिए भी उपयोगी बताया है। वह कई वर्षों से साइकिल का उपयोग कर रहे हैं। सुबह-शाम शहर में घूमने के लिए सुरजीत साइकिल का ही उपयोग करते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जी की अपील के कई उद्देश्य हैं। पर्यावरण की रक्षा के साथ हम विदेशी मुद्रा की बचत करेंगे। इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। नगर पालिका बालाघाट में भी ईंधन बचाने को लेकर कार्ययोजना बनाई जा रही है।
वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए हम सबके लिए जरूरी है कि हम ईंधन की बचत करें। ईंधन की सप्लाई को लेकर कई तरह की विषम परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हमें मिल-जुलकर प्रयास करने होंगे। कलेक्ट्रेट सहित फील्ड स्तर पर अधिकारियों के लिए कारपूलिंग की व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई है। इसमें अधिकारी अपने-अपने सरकारी वाहनों को आपस में साझा करेंगे।- मृणाल मीना, कलेक्टर, बालाघाट