
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। जब अस्पताल की राष्ट्रीय स्तर पर साख बढ़ी थी, तब उम्मीद जागी थी कि यहां की व्यवस्थाएं पटरी पर आएंगी, सुविधाओं का विस्तार होगा, लेकिन एक साल बाद भी अस्पताल की व्यवस्थाएं बे-पटरी हैं। इसकी पाेल एक बार फिर कलेक्टर मृणाल मीना ने ही खोली है, जब उन्होंने तड़के करीब चार बजे अस्पताल में ‘स्ट्राइक’ कर दी।
यहां मरीजों को बिस्तर नहीं मिलने और जमीन पर सोने के लिए मजबूर करने की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर जिला अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने जो नजारे देखे, वो उस शिकायत को सच साबित कर गए। कलेक्टर ने मेडिकल और महिला वार्ड का जायजा लिया।
निरीक्षण में पाया कि वार्ड के सभी बिस्तर भरे हुए हैं। कुछ मरीज फर्श पर बिछे मैट्रस पर लेटे हुए हैं। ये देखते ही कलेक्टर नाराज हो गए। उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई और तत्काल व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।
जिला अस्पताल में रात के समय कर्मचारियों से लेकर सुरक्षा गार्डों का ड्यूटी में गहरी नींद लेना, नई बात नहीं है। कलेक्टर ने निरीक्षण में कर्मचारियों की इसी अव्यवस्था को रंगे हाथों पकड़ लिया। आउटसोर्स कर्मचारी एमएसडब्ल्यू आविष्कार मेश्राम, कैलाश झलपे और सुरक्षा गार्ड राधेश्याम बघेले ड्यूटी के दौरान गहरी नींद में मिले। कलेक्टर ने तीनों की सेवा समाप्त करने के निर्देश दिए।
ड्यूटी पर तैनात डाॅक्टर और नर्स के खिलाफ भी जांच के निर्देश दिए। दरअसल, कलेक्टर को एक मरीज ने फोन पर जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं की शिकायत की थी, जिसके बाद कलेक्टर ने तड़के चार बजे का समय चुना, जब जिम्मेदार बेफिक्र रहते हैं। कलेक्टर ने मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के ठहरने के लिए भी अस्पताल परिसर में उचित स्थान पर व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इस दौरान सीएमएचओ डा. परेश उपलप भी उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने सिविल सर्जन डा. निलय जैन, ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों एवं स्टाफ से अस्पताल की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने भर्ती मरीजों से भी चर्चा की। उपचार और सुविधाओं के संबंध में फीडबैक लिया।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को आवश्यकता के अनुसार बिस्तर उपलब्ध कराएं। एक भी मरीज फर्श पर सोता हुआ नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीजों की समुचित देखभाल, समय पर उपचार एवं आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। नियमानुसार सभी सुविधाएं मरीजों को प्रदान की जाए।
यह भी पढ़ें- जबलपुर के जेठी हास्पिटल में गोलमाल, बेटी का जन्म, डिस्चार्ज हुई तो थमाया बेटा, हंगामे के बाद मिली दूसरे अस्पताल में